personality development

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सोशल ईविल, life, Society

“अवसर का पल “

आगे बढ़िए परंतु आत्मा की सहमति के साथ

हमारा सारा जीवन एक अवसर के इर्द-गिर्द घूमता है और हमारी कामयाबी और नाकामयाबी के बीच केवल एक क्षण का अंतर होता है और वह है ‘अवसर का पल ‘जिन्हें अवसर मिल जाता है वह जीवन की बुलंदियों को छू जाते हैं और जिन्हें अवसर छूकर निकल जाता है अर्थात जो अवसर का लाभ नहीं ले पाते उनके हिस्से केवल पछतावा रह जाता है !पछतावा उस क्षण को खोने का जो लाभ से परिपूर्ण था और हम छल – कपट का साथ न दे सके !

अंतरमन को टटोलिए

सदैव मन कटोता रहता है कि काश उस पल हमने मन की न सुनी होती ! यहां जब सभी एक दूसरे से छल – कपट करते हैं , तो अगर मैंने भी किसी के साथ छल किया होता तो उससे क्या अंतर पड़ जाता ? क्या केवल हमारे ही बलिदान से दुनिया सुधर जाएगी ? क्या केवल हमारे समझने मात्र से दुनिया समझदार हो जाएगी ? क्या सारा जीवन केवल हम ही लोगों को समझते रहेंगे ? क्या लोग कभी हमें समझने का प्रयास नहीं करेंगे ?……………….आदि !

क्या आप भी असीम संपत्ति के मालिक हैं

हां यह सही है कि मैंने जीवन में कोई खास मुकाम हासिल नहीं किया ! बंगले – गाड़ी – गहने जैसी भौतिक संपत्ति अर्जित नहीं की , मगर मैंने संबंधों को जिया है ! मैंने संबंधों की असीम संपत्ति अर्जित की है ,एक कभी न टूटने वाला विश्वास हासिल किया है !

क्या आप भी मानते हैं कि आप औरों से अलग हैं

आप में से कितने ही लोगों ने जीवन को अपने ही अंदाज में जिया होगा आपके लिए संबंध ही संपत्ति रहे होंगे और संबंधों को ही संपत्ति मान कर आप जीवन में आगे बड़े होंगे ! यदि आप भी उनमें से एक हैं ,तो आपको गर्व होना चाहिए अपने लालन-पालन पर जिसने आपकी अंतरात्मा को जिंदा रखा ,जिसने आप में लोगों को दुख न देने का हुनर जीवित रखा ,स्वयं दुख सहकर भी दूसरों को दुख न देने का आपका यह दृष्टिकोण ही है जो आपको और से अलग बनाता है !

क्या आप भी स्वयं से क्षमा मांगने वालों में से एक है

दूसरे लोगों की तरह आप भी सफल हो सकते थे ,क्या आपने कभी अपनी आत्मा से यह प्रश्न किया है ? और आपके अंतर्मन से यह उत्तर भीअवश्य मिला होगा कि किसी के साथ छल – कपट करके में भी एक सफल व्यक्ति बन सकता था और पश्चाताप से बचने के लिए दूसरों से क्षमा – याचना करके मन का बोझ हल्का कर सकता था ! मगर ,मैंने लोगों से क्षमा – याचना की अपेक्षा स्वयं से क्षमा मांगना अधिक उचित समझा !

यही कारण है कि मैं आज गर्व से कह सकता हूं कि मैं केवल जिंदा दिखाई ही नहीं देता अपितु अंदर से भीे जिंदा हूं और जो अंदर से जिंदा है वास्तव में वही जिंदा है !

कहीं आपके लाभ का मूल्य भी दूसरों की हानि तो नहीं

यहां अवसर के पल से मेरा तात्पर्य नकारात्मक अर्थ में नहीं है कि अवसर का लाभ ही ना उठाया जाए सकारात्मक अर्थों में मेरा तात्पर्य है कि अवसर का लाभ तो उठाया जाना चाहिए परंतु स्वयं के लाभ के साथ-साथ इस बात का ध्यान भी रखा जाना चाहिए कि कहीं हमारे लाभ की कीमत दूसरे की हानि तो नहीं ! आज के इस प्रगतिवादी युग में अवसर का लाभ कौन उठाना नहीं चाहता ? विकास के पथ पर सदैव अग्रसर रहीए ,खूब प्रगति कीजिए भौतिक सुख समृद्धि के साथ-साथ आत्मिक संतुष्टि का भी ध्यान रखिए क्योंकि सहअस्तित्व में ही वास्तविक समृद्धि है !

आत्मा की स्वीकृति

अब प्रश्न यह उठता है कि सही गलत का निर्णय कैसे हो ? तो इसका सबसे उचित मार्ग है अंतरमन ,जब भी आपके समक्ष कोई अवसर आए तो सबसे पहले अपने अंतर्मन को टटोलिए , आत्मा की स्वीकृति ही सही अथवा गलत की निर्णायक होगी ,याद रखिए गलती आप से हो सकती है अंतरात्मा से नहीं !

सदैव उचित मार्ग का अनुसरण कीजिए अगले ब्लॉग में फिर मिलेंगे तब तक के लिए हंसते – रहिए , हंसाते – रहिए ,जीवन अनमोल है मुस्कुराते रहिए !

धन्यवाद

🙏🙏🙏