life, motivation, personality development

“विश्वास की डोर न हो कमजोर !”

विश्वास और अविश्वास में द्वन्द

विश्वास और अविश्वास के मध्य द्वंद सदैव चलता रहेगा !इससे संबंधों में कलेश भी होगा और संबंध अपनी महक भी बिखेरते रहेंगे ,कभी नकारात्मकता हद से बढ़ जाएगी तो कभी जिंदगी एक कभी ना भरने वाला घाव लगने लगेगी और जब विश्वास के मोती बिखरने लगेंगे तो अपनों से संबंध टूटने की कल्पना मात्र से सेहर ने लगेंगे !

विश्वास के स्तर

हम विश्वास किसी ना किसी रूप में सब पर करते हैं फिर चाहे वह मित्र हो माता – पिता ,भाग्य ,संबंध ,हां यह बात और है कि विश्वास का स्तर भिन्न – भिन्न संबंधों में भिन्न-भिन्न हो सकता है !

विश्वास अर्थात शक्ति

वास्तव में विश्वास एक समय विशेष में एक व्यक्ति विशेष के प्रति मन में जागृत होने वाला एक सकारात्मक भाव है !जो व्यक्ति को सम्मान के शीर्ष पर बैठा देता है सम्मानीय व्यक्ति को यदि ईश्वर के बाद दूसरे पायदान पर रख दिया जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ! आपने लोगों को यह कहते अवश्य सुना होगा की यदि ईश्वर आस्था का विषय ना होता तो शायद जीवन में विश्वासपात्र व्यक्ति का स्थान प्रथम होता !जब कोई बीमार हो तो डॉक्टर , जब आप घर बना रहे हो तो इंजीनियर , जब रोड क्रॉस कर रहे हो तो ट्रैफिक लाइट ,जब बच्चे हो तो माता पिता , और जब बूढ़े हो तो बच्चे !इस प्रकार प्रत्येक स्तर पर कोई ना कोई आपके विश्वास का आधार है अर्थात हर स्तर पर कोई ना कोई है जो आपको शक्ति प्रदान करता है !

प्रश्न का अर्थ है संदेह अर्थात अविश्वास

विश्वास नाम ही एक ऐसी शक्ति का है जो हमारे अंदर एक ज्वाला सी प्रज्वलित कर देती है !क्या हम में से कभी किसी ने ईश्वर को देखा है ?नहीं न !ना देखने के बाद भी अगर हम किसी वस्तु के अस्तित्व में विश्वास करते हैं तो तात्पर्य यह हुआ कि हम उस से प्रेम करते हैं !या उस में आस्था रखते हैं !एक ऐसा प्रेम जिसके आगे केवल नतमस्तक हुआ जाता है बिना किसी प्रश्न के क्योंकि प्रश्न का अर्थ है संदेह और संदेह का अर्थ है अविश्वास !

विश्वास नाम है एक अद्भुत शक्ति का

विश्वास एक ऐसा करिश्माई शब्द है जो स्वयं में ही पर्याप्त है क्योंकि विश्वास में एक अद्भुत शक्ति होती है और विश्वास की यही शक्ति असंभव को संभव बना देती है विश्वास एक स्तंभ है जो किसी व्यक्ति अथवा वस्तु को उसकी संपूर्णता में देखता है !अर्थात सकारात्मक पक्ष को संबल प्रदान करता है अनियमित को नियमित में बदल कर अर्थात असत्य को सत्य में बदलकर विकास का मार्ग प्रशस्त करता है !

विश्वास और आत्मविश्वास इच्छा शक्ति के धोतक हैं

विश्वास आपको लोगों से जोड़ता है और आत्मविश्वास आपको जीवन की रेस में आगे ले जाता है और विकास का मार्ग प्रशस्त करता है !किन्हीं विशेष परिस्थितियों में आत्मविश्वास में कमी एक सामान्य लक्षण है !संशय ,संदेह और द्वंद भी मानव मन की एक असंतुलित स्थिति का परिचायक है जो स्थिति विशेष में देखने को मिलता है परंतु प्रत्येक स्थिति में आसंतुलित व्यवहार दो नकारात्मक पक्षों को दर्शाता है एक मानसिक असंतुलन अर्थात मानसिक रूप से रोगी होना और दूसरे आत्मविश्वास मैं कमी का होना !

इससे आपका ढुलमुल रवैया सामने आता है जिससे आप में आत्मविश्वास की कमी उत्पन्न होती है और अन्यों का आप में अविश्वास बढ़ता है !उपरोक्त दोनों ही स्थितियां आपके विकास व आपकी प्रगति को बाधित करती हैं जिससे आप में हीन भावना का विकास होता है !

16 विचार ““विश्वास की डोर न हो कमजोर !”&rdquo पर;

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