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“झोला छाप डाक्टरों से सावधान !”

आजकल हमारे भारतीय समाज में एक विशेष फैशन चलन में है और वो है धार्मिक आधार पर व्यक्तियों के मस्तिष्क का EMI !करना जब से BJPसरकार क्या आयी ?मानो झोला छाप डॉक्टरों की बाढ़ सी आगयी है !ये लोगों के मस्तिष्क का ऍम. आर .आई आखों से कर लेते हैं और रोगी की तकलीफ को बिना कहे ही समझ लेते हैं !महाज्ञानी जो ठहरे !महाज्ञान के इस कुम्भ में हर कोई डुबकी लगा लेना चाहता है !एक ऐसी अधार्मिक डुबकी जो धर्म (सत्य )को धो दे !

जी हाँ मैं बात कर रही थी अखंड भारत का झूठा दम्भ भरने वाले राष्ट्रवादियों की !आज संकुचित एवं रोगी मानसिकता के साथ राष्ट्रवाद किस दिशा में जा रहा है जिसे देखो वही राष्ट्र का ठेकेदार बना हुआ है वास्तव में आजकल राष्ट्रवाद राष्ट्र हित से कम और निजी स्वार्थों से अधिक संचालित हो रहा है !

जब कांग्रेस की बात आती है तो राष्ट्रवाद बनाम वंशवाद में लड़ाई छिड़ जाती है , कभी राष्ट्रवाद बनाम जातिवाद का ,कभी राष्ट्रद्रोह बनाम राष्ट्रवाद ,कभी जय हिन्द बनाम राष्ट्रवाद , कभी जय मोदी बनाम राष्ट्रवाद कभी वन्देमातरम बनाम राष्ट्रवाद …………….? राष्ट्र वाद का इतना संकुचित द्रष्टिकोड आपलोगों ने पहले कभी नहीं देखा होगा जहां व्यक्ति को प्रत्येक क्षण अपने राष्ट्रवादी होने का प्रमाण देना पड़े वो भी ऐसे लोगों को जिनके लिए राष्ट्रवाद एक निजी संपत्ति हो गया हो अब अगर आप स्वयं को राष्ट्रवादी घोषित करना चाहते हैं तो इनसे प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा मानो राजनीती न हुई दलगत आतंकवाद हो गया !

समय रहते निकाल फेकिये संकुचित दृष्टिकोण को

हमारे संविधान की आत्मा से धर्मनिरपेक्ष व लोकतंत्र मानो समाप्त होने की कगार पर है और ये सब कुछ टूच -पुँजिये कम अक़्ल , कम पढ़े लिखे अथवा पढ़े लिखे जाहिलों का काम है !इन सिद्धांतों का मूल्य वह बुद्धिजीवी वर्ग जानता है जिसने इतिहास पढ़ा है स्वतंत्रता संग्राम और देश की आज़ादी के लिए जान गवाने वाले सपूतों की माओं-बहनो -बेटियों के दुःख दर्द को महसूस किया है !

यदि राष्ट्रवाद का बिगुल छेड़ना ही है तो धार्मिक सौहार्द के लिए छेड़िये ,विकास के लिए छेड़िये ,समाजवाद के लिए छेड़िये ,आतंकवाद के लिए छेड़िये अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर साख बनाने के लिए छेड़िये ,भ्रष्टाचार के विरुद्ध छेड़िये , लोकतंत्र की बहाली के लिए छेड़िये , धर्म निरपेक्षता के लिए छोड़िये …………………..!

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Pic by pixabay

यह एक तथ्य आधारित सत्य है आप जिसपर जितना अविश्वास प्रकट करेंगे वह व्यक्ति उतना ही विद्रोही प्रवृत्ति धारण करता जायेगा !क्या हम भारतियों के प्रति अंग्रेज़ों के अविश्वास को भूल गए !याद रखिये अविश्वास की स्तिथि भ्रम उत्पन्न करती है और भ्रम ले डूबता है इस भ्रम से उत्पन्न तूफ़ान में सब घिर जाते हैं फिर चाहे वह वास्तु हो व्यक्ति अथवा सरकार !

सरकार शब्द में एक मत्वपूर्ण संकल्प निहित है !ये संकल्प है संविधान की आत्मा के स्वरुप को ज्यों का त्यों बनाये रखने का क्यूंकि लोकतंत्र का अर्थ जनता का जनता के द्वारा जनता के लिए किया जाने वाला शासन है न की” सरकार का सरकार के द्वारा सरकार के लिए किया जाने वाला शासन !”मूल ही वास्तविक सुगन्धयुक्त फूल है आत्मा में बदलाव शूल है !

में स्वयं पर कोई धार्मिक अथवा जातिगत बन्धन आरोपित करके एक व्यक्ति से भिन्न कुछ भी मानन्ना नहीं चाहती !मैं एक सामान्य व्यक्ति हूँ भारत की एक आम नागरिक ! याद रखिये हम सभी भारत के नागरिक है हमारी एकता में ही भारत की शक्ति है और हमारी शक्ति का प्रतीक है अखंड भारत !

हमारा देश संवेदनशील स्थिति से गुज़र रहा है एकता बनाये रखिये अगले ब्लॉग में फिर मुलाक़ात होगी तब तक के लिए हँसते रहिये -हसाते रहिये जीवन अनमोल है मुस्कुराते रहिये !

जय भारत

🙏🙏🙏

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62 विचार ““झोला छाप डाक्टरों से सावधान !”&rdquo पर;

  1. संकुचित दृष्टिकोण पूर्वाग्रही मानसिकता थोथा धर्म जो हत्या आधारित है जिससे विश्व त्राहि त्राहि कर रहा है जिसे राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान पर आपत्ति है। रहा धर्म निरपेक्ष और समाजवाद तो इंदिरा जी ने 1975 की इमरजेंसी के वक्त 42वा संविधान संधोधन कर घुसा दिया। समाजवाद एक खोखली अवधारणा है जो सत्ता के ध्यान बटना है 60 साल में कांग्रेस कितना समाजवाद कितनी गरीबी दूर कर पायी।उसी रायबरेली के गरीब के घर से तीन पीढ़ी प्रचार की 40 साल के गरीबी के नारे सिर्फ परिवार आधरित राजनीति की गाथा बने। जिस पार्टी को अपना समर्थक दुश्मन कह रहा है। जिसने देश को राजनीतिक जातिवाद में बांट सत्ता की मलाई चाटी अल्पसंख्यक तुष्टीकरण में एक अल्पसंख्यक को गरीबी में रहना और नारी का शोषण सिखा दिया नारी की भी आदत पड़ गयी इसकी। महान राष्ट्र को जिसने पिद्दी देश के आगे झुका दिया जिसने आतंकियों को सह टेरर फंडिंग की जिससे वोट बैंक बना रहे। जिसने मुम्बई जैसे बीभत्स कांड पर मुज्जमत की आतंकियों के हौसले बढ़े पूरा भारत आतंकियों ने बम विस्फोटों से दहला दिया। सुर वही चलता रहा धर्म की निरपेक्षता का देश की आबरू लुटती रही देशद्रोही वोट से चिपका रहा वह सत्ता की जोक बन गया। सड़के,हॉस्पिटल,बिजली,पानी,विकास या बुनियादी ढांचा कितना विकसित हुआ ये पुस्तकों में कैद हुआ या तो नेताओं और उनकी पीढ़ियों अरबपति बनी। फिर भी बहुत से लोग बेगाने बने देश लुटते देखते रहे। मीडिया,बुद्धिजीवी,पुस्तक सभी पर उन्ही की दस्तखत थी। आज ही कांग्रेसके बड़े लीडरान ने कहा भी है मोदी मॉडल को समझना होगा उसे विलेन सिद्ध करने से कांग्रेस पार्टी नीचे जा रही है आखिर 47% वोट मिला है जो सभी जातिवर्ग से मिला है। शायद भूल गये 2014 में ही उमर अब्दुल्ला ने कहा था 2024 कि तैयारी करनी चाहिए अब लगता है 2034 में भी सत्ता कांग्रेस के लिए स्वप्न रहेगी क्योकि जनता भी चोरों के छलावे की पहचान कर ली है। व्यक्तिगत मलाई वाले के चिल्लाने से सत्ता के रास्ते नहीं मिलते है।

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    1. मैंने आपसे पहले भी कहा था की मैं किसी पूर्वग्रह से ग्रसित मानसिकता वाले किसी भी व्यक्ति से कोई चर्चा करना नहीं चाहती !रही बात वे 42 संशोधन 1976 की ,तो वो तो जग ज़ाहिर है की इस संशोधन द्वारा “समाजवादी धर्म निरपेक्ष और एकता व अखंडता शब्द जोड़े गए और उससे कई बदलाव आये पंचवर्षीय योजना , इंदिर आवास योजना शिक्षा हरित क्रांति अंतरिक्ष कार्यक्रम आई टी क्षेत्र की सफलता महिला सशक्तिकरण हेतु संविधान संशोधन अधिनियम हरित क्रांति श्वेत क्रांति पीली क्रांति नीली क्रांति देश को विविधता में एकता के सूत्र में पिरोये रखना

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      1. फिर पढ़िये हरित क्रांति,श्वेत क्रांति शास्त्री जी के समय हो चुकी थी। अन्तरिक्ष कार्यक्रम को देखे तो 1962 से शुरू 1969 में इसरो को स्थापना हो चुकी थी। 42 संविधान संशोधन को मिनी संविधान और संविधान का बलात्कार की उपमा संविधानविदों ने दी। 44 संविधान संशोधन के माध्यम से 42संशोधन को मोरारजी देसाई ने कुछ को छोड़ सब बदल दिया। लोकतंत्र की दुहाई और इमरजेंसी के उपबन्ध को समर्थन। धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद जल्द ही हटा दिया जायेगा मूल संविधान को लाया जाएगा यहाँ।

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      2. विकास के लिए कंक्रीट किसने तैयार किया पहले पाकिस्तान को दो भागों में विभाजित कर और फिर पूर्वी पाकिस्तान का अस्तित्व समाप्त कर कूटनीतिक जीत किसने हासिल की ?सैन्य सशक्तिकरण और महिला सशक्तिकरण किसके प्रयासों का परिणाम है ! आतंकवाद के लिए जान किसने दी ?क्या इंदिरा गाँधी की मृत्यु ऑपरेशन ब्लुएस्टार का परिणाम नहीं थी ? LTTEके आतंकवादी हमले के शिकार राजीव गाँधी जी नहीं हुए थे क्या ?यदि कांग्रेस की तीन गेनेरशनों ने शासन किया तो दो ने इस देश के लिए जान भी गवई है !दीर्घकालिक योजनाओं का प्रभाव भी दीर्घकालिक ही होता है हमारी हाल ही की सरकार में तो इतना समर्थ भी नहीं की पूर्व सरकार की योजनाओं को सशक्त ढंग से लागू कर सके ,धर्म -धर्म खेलने से फुर्सत मिले तो आगे कुछ सोच पायें और अच्छा है धर्म निरपेक्षता की आड़ में अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर छबि भी समाप्त हो जाएगी !मैं नहीं जानती मगर आपके ब्लॉग पर हुए सारे डिस्कशन से ऐसा ही लगता है की आप मुस्लिम्स के प्रति द्वेष रखते और उसके लिए मुझे भी टारगेट करते हैं !यदि आपको मुस्लिम्स से इतनी ही प्रॉब्लम है तो मुझसे बात क्यों करते हैं !प्लीज आग्रह है आपसे यदि पूर्वाग्रह रहित होकर बात कर पायें तो You are most welcome नहीं तो 🙏

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      3. ब्लूस्टार का कारण भी जान लेना था अकाली को गिराने के इंदिरा ने भिंडरावाले को समर्थन
        दिया बाद में वही कांग्रेस का काल बन गया।गुरुद्वारासाहिब पर हमला करने के एवज में जान गवाई।
        श्रीलंका LTTE प्रभाकरन को पहले खड़ा किया गया उसे तमिलनाडु में प्रशिक्षण दिया गया फिर सेना शांति के लिए भेजा राजीव ने और प्रभाकरन से ही जूझ गये। एक तमिल सैनिक ने मार्चिंग पास्ट में बट से राजीव पर प्रहार पहले ही कर चुका था। फिर कांग्रेस की कॉन्सपिरेसी अर्जुनसिंह vp सिंह की आरोप तो सोनिया पर भी पेरंबूर की सभा छोड़ के वह सदा राजीव के साथ रहती थी। राजीव ऊपर से आये थे सीधे उन्हें शतरंजी चाले कांग्रेस की कभी समझ न आई जिसने जो राय दी वही कर गये। सिखों के संघार को बड़ा पेड़ का गिरना बताया। अरे आप के भोपाल गैस त्रासदी यूनियन कार्बाइन में एंडरसन को cm अर्जुन सिंह राजीव जी के कहने में दिल्ली पहुचाया दंश आज भी झेल रहा है भोपाल। बोफोर्स और कॉत्रोचि को जाने दीजिए

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      4. द्वेष मेरा नहीं द्वेष तो आपको है धर्मनिरपेक्ष क्या है आप? ये सेक्युलिरिज्म शब्द ही मूर्खतापूर्ण है इसकी उत्तपत्ति कैसे हुई और प्रयोग क्यों हुआ जान लीजिए तो समस्या खत्म । रही धर्म की बात तो गांधी और नेहरू के सेकुलर गान के बाद जिन्ना ने देश को बाटा लड़ के लेंगे पाकिस्तान । उस नीति का क्या जो देश के टुकड़े करा दे। हिंदी चीनी भाई भाई ,पंचशील की हत्या तुरंत चीन कर दी ,फिर क्या हुआ नीतियों का??

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      5. यह संशोधन 1976 में इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते किया गया। उस समय देश में एमरजैंसी लगी हुई थी तथा एमरजैंसी के दौरान ही किया गया यह संशोधन आज तक कायम है। इसे मिनी संविधान भी कहा जाता है। इस दौरान ही संविधान में 10 मौलिक कत्र्तव्य भी शामिल किए गए। ये कर्तव्य स्वर्ण सिंह कमेटी की सिफारिश के आधार पर तय किए गए। इसके अलावा इस संशोधन दौरान पांच काम स्टेट लिस्ट से निकाल कर कन्कुरैंट लिस्ट (समन्वय सूची) में डाले गए। शिक्षा, जंगल, जंगली, जीवन की रक्षा, नापतोल के यंत्र तथा न्यायिक प्रशासन जैसे विषयों पर प्रदेश व केंद्र दोनों को कानून बनाने का अधिकार मिला !हालांकि इस संशोधन के पीछे उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का राजनीतिक मकसद भी था परंतु उस समय यह तर्क दिया गया कि देश को धार्मिक, सामाजिक व आॢथक तौर पर विकसित करने के लिए इन संशोधनों की जरूरत है। खास तौर पर सैकुलर शब्द जोडऩे के पीछे यह तर्क दिया गया कि देश का कोई अपना धर्म नहीं है तथा देश सारे धर्मों का समान रूप में आदर करेगा। इसके अलावा इंटैग्रिटी शब्द भी आजादी, न्यायिक व्यवस्था, समानता तथा भाईचारे को मजबूत करने के लिए जोड़ा गया जबकि आॢथक असमानता को दूर करने के लिए संविधान में सोशलिस्ट शब्द जोड़ा गया।आपके हिसाब सेकुलरिज्म ठीक नहीं है मेरे हिसाब से एक राष्ट्रीय एकता व अखंडता को बनाये रखने के लिए एक अच्छी अवधारणा है और मुझे अपने विचार अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता है !

         

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      6. चलते चलते! स्पष्ट कर दू ●● आपके जो भी आरोपण है वह आपके बुद्धि विवेक प्रज्ञा को दर्शाता है। दो आयाम पर चाहे तो व्यक्ति का निष्कर्ष निकाला जा सकता है पहला वह जानता नहीं दूसरा वह छद्मवेशी है। अंग्रेज़ो ने मदर पर रिसर्च किया तो उसके लिए एक अच्छी मां बंदर को वीकर में डाला जब पानी नाक तक नहीं आ गया बदरिया बच्चे को ऊपर उठाई थी जब पानी नाक तक पहुँच बंदरिया प्राण बचाने के लिए बच्चे पर चढ़ गई।
        सेकुलिरिज्म एक यूरोपीय विचार है जो थियोक्रेसी (धर्म तंत्र) के विरूद्ध आया क्योंकि वहाँ राजा कोई नियंत्रण और शासन पोप का चलता था राजा नाचीज़ रहता था। पोप माफी पत्र बेच रहा है जिसका मार्टिन लूथर किंग ने जर्मनी से विरोध किया। वहाँ के राजा को धर्मतंत्र या कहे पोपतंत्र से मुक्ति के लिए सेक्युलिरिज्म( धर्म निरपेक्ष) की आवश्यकता पड़ी। धर्म निरपेक्ष का मतलब है धर्म से विमुख या निष्क्रिय हो जाना जो मानवीय स्वभाव नहीं है आत्मा की बात न करके यदि शरीर की करें तो यह निष्क्रिय कैसे हो सकता है ? शरीर का एक धर्म मल मूत्र,थूक,पसीना जैसी चीजें रोज निकलती है ।भारत में सदा से पंथ निरपेक्षता रही है जैन,बौद्ध,लोकायत,सिख यही अवतरित हुये पारसी को संरक्षण दिया गया। जंगल में बैठा संत कहता है प्राणियों में सद्भावना हो विश्व का कल्याण हो सर्वे भवन्तु सुखिनः सभी सुखी हो। इसी लिए संविधानविद धर्मनिरपेक्षता को रख कर पंथनिरपेक्षता रखा यही ग़ांधीजी का भी मत है।
        संकीर्ण औरा तथा तंग गलियों का मुसाफिर नहीं हूं जो गलत है उसे गलत कहने का साहस है आपने तो तीन तलाक, कश्मीर के मुस्लिम या कांग्रेस की गलतियों को जस्टिफाई कर दिया। विश्व मे इस्लाम की संख्या बताई उसके कारण में बर्बरता नहीं दिखी न पूर्व में न बर्तमान में isis के अत्याचारों को भारत में सुन्नी मुसलमानों ने सही ठहराया । एक बात स्पस्ट है कि जिहाद के नाम पर जो आतंकवाद उसे कही न कही सहमति इस्लाम से मिली है। फिलिस्तीन की समस्या को जायज माने तो ईरान के पारसी , मालदीप के बौद्धों का क्या हुआ। एक फिलिस्तीन के लिए कितनी जाने ली जाएगी।नवी ने शांति के लिए
        हिजरत किया मक्का से मदीना फिर फिलिस्तीन पर जद्दोजहद क्यों है।इसी मसले को लेकर विश्व का पहला आतंकवादी सैयद अल कुस का मिश्र में पैदा हुआ इसी के विचार पर लादेन आगे बढ़ा।
        विश्व की राजनीति के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है धर्म के नाम पर मुस्लिम देश बांट लिया 33% भूभाग अब फिर उसे कश्मीर स्वतंत्र चाहिए फिर केरल और बंगाल क्या गलती थी भारतीयों जो मुस्लिम की जनसंख्या बढ़ने दिया । सेक्युलिरिज्म देश को बर्बाद किया जब तक व्यक्ति को अपनी संस्कृति का भान नहीं रहेगा उसमें विश्वास कैसे पैदा होगा। भारत मे अब्दुल कलाम का चित्र रामेश्वर मंदिर में लगाई ,लाल चौक पर वह तिरंगा फहराया गया जो अब्दुल हमीद के की पत्नी के हाथों से मिला था।
        पाकिस्तान में लाहौर किले के पास रणजीत की मूर्ति लगी तो सिंध में राजा दाहिर को पूर्वज मानने के लिए यात्रा निकाली गई।
        उन्होंने बर्बर आक्रमणकारियों गजनवी,तैमूर,गोरी,बाबर से जोड़ने को मना कर दिया । भारत के मुस्लिम अफरासियाब के वंशज लगते है उनके पूर्वज हिन्दू नहीं थी न ही तलवार के कारण एक भी हिन्दू मुस्लिम बनाया गया था???😢

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      7. आप जो चाहें कह सकते हैं आप वैचारिक अभिव्यक्ति के लिए स्वतंत्र हैं !यह सिद्धांत व्यक्ति के निष्क्रिय होने पर नहीं अपितु राज्य के निष्क्रिय होने पर है जैसा कि कहा गया है कि राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होगा और ना ही राज्य किसी धर्म विशेष का समर्थन करेगा !बाक़ी व्यक्ति की निष्क्रियता तो मौलिक कर्तव्यों, उसकी समझ बुझ ,ज्ञान, विवेक, मानवतावादी दृष्टिकोण और सहिष्णुता पर निर्भर करता है !पंथ का अर्थ है मार्ग और एक उचित मार्ग पर धर्म के आधार पर ही पंहुचा जा सकता है तो हम क्यों नहीं मान लेते कि धर्म सब को जोड़ता भी है और मानवीय एकता में सबसे बड़ा रोड़ा भी यदि सबकी मान्यताये अलग अलग हैं तो मार्ग भी अलग अलग ही होंगे !आप 1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन से प्रभावित है जिसमें विवेकानंद जी ने स्वयं को हिंदू धर्म का अनुयाई बताते हुए गर्व का अनुभव किया था और साथ ही यह भी कहा था कि यह हिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है जिसने संसार को सहिष्णुता तथा सार्वभौम इक स्वीकृति दोनों की शिक्षा दी है थी !साथ ही विवेकानंद जी एक वैश्विक धर्म बनाना चाहते थे !ये उनकी वेचैक अभिव्यक्ति थी एक व्यक्तिगत सोच थी आज 126वर्ष के बाद भी क्या ये संभव हो पाया नहीं न !इसे मेरा उदारवादी द्रष्टिकोड समझा जाना चाहिए !अर्थ यह हुआ की धर्म धारण करने की चीज़ है थोपने की नहीं !वैचारिक अभिव्यक्ति की बात है मुझे जो ठीक लगा मेने कहा तलाक़ का मुद्दा शरई पॉइंट ोव व्यू से गलत है तलाक़ का सही प्रोसीज़र आप इस वीडियो में समझ सकते हैंhttps://youtu.be/PRUiq_FJyCs, कश्मीरी मुस्लिम्स की बात तो आप उसे इस द्रष्टिकोड से नहीं समझ सकते क्यूंकि आप उनके प्रत्यक्ष संपर्क में नहीं रहे हैं और यदि कांग्रेस की बात करैं तो मैं किसी पार्टी विशेष का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही हूँ भारत की एक आम नागरिक होने के नाते क्या अपने विचार रखने का अधिकार नहीं है मुझे ?रही बात इस्लाम की तो आपने इस्लाम की नेगेटिव पॉइंट ऑफ़ व्यू से काफी रिसर्च कर उसके नकारात्मक पक्ष से काफी प्रभावित भी हुए हैं !रही बात आतंकवाद की तो यह एक सार्वभौमिक बुराई है परन्तु उत्पत्ति भी वैचारिक विषय है !ठीक है नबी ने शर को टालने के लिए हिजरत की मतलब उसी तर्हां से मुस्लिम्स को फिलिस्तीन से हैट जाना चाहिए ये आपका पॉइंट ऑफ़ व्यू है परन्तु कोई भी निर्णय लेने का अधिकार वहाँ के लोगों का है !वैश्विक राजनीति में भारत की कोई भूमिका नही परन्तु भारतीय राजनीती में तो है !फिर जनसँख्या की दृष्टि से आप अमानवीय बातें कर रहे हैं !सेकुलरिज्म रहा तब तो भारतियों में एकता बनी हुई है लोगो का सरकार में विश्वास है किसी अन्याय की स्तिथि में न्यायालय की शरण का विकल्प है तब तो इतनी शांति है अन्यथा क्या होता ?रजीत सिंह की मूर्ति पर सकारात्मक ढंग से विचार करने की आवशयकता है दबाव समूहों पर नहीं !एक सच्चा मुसलमान अमनपरस्त होता है क्यूंकि वह मोहम्मद साहब के सिद्धांतों को फॉलो करते हैं !मिडिल ईस्ट में इस्लाम कैसे फैला ?

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      8. सच्चा मुसलमान कहा है ? 54 देशों में सच्चे मुसलमान की कही किसी ने सुना क्या । भारत में चलिये मान ले आप की बात हिन्दू कट्टर है तो पाकिस्तान,अफगानिस्तान,सीरिया,यमन,ईरान,सऊदी अरब,उत्तरी सूडान,लीबिया,नाइजीरिया,मिश्र,जॉर्डन किससे लड़ रहे है कौन है जो मस्जिद में सामाजिक जलसे में बम विस्फोट कर रहा है। युवा किस लिए isis की कठपुतली बन गया।नारी कितने बच्चे करेगी क्या यह मुस्लिम पुरुष निर्धारित करेगा। अलीगढ़ विश्व विद्यालय हो जामिया मिलिया वहाँ इंडिया पाकिस्तान के मैच में आपको लगेगा नहीं कि आप भारत की सीमा में है। देवबंदी,बरेलवी और देहलवी सुन्नी होने के बाद एकदम भिन्न विचार रखते है जिहाद पर सब अलग सोचते है तो मूल कुरान एक है इतने धड़े बने कैसे। अहमदिया को काबे में पिछले दिनो घुसने नहीं दिया उन्हें एक मौलवी मुसलमान से खारिज कर दे रहा है कुरान और अल्लाह में तो उसे इत्मिनान है फिर क्यों? शिया,कूर्द के साथ यही हाल है। जब इतनी कट्टरता अपने ही पंथ से है वह कैसे अन्य धर्म से राफ्ता रखेगा।
        आज इस्लाम के शाह चेहरे को रौंदा जा चुका है उसके बचाव की किसी ने हिमाकत नहीं की
        कट्टरपंथ ने सूफियों को चुन चुन खत्म किया।
        आज मात्र3% मुल्ला मौलवी धर्मपंथी या नेता इस्लाम पर कब्जा जमा लिया। किसने सुधार से रोका है किसने कहा मध्यकाल से न निकले। पॉलिस्टर का बुरखा जून के महीने में पहन के गरीब बहने पैदल चलने में बेहोश हो जाती है कितने को बीमारी हो जाती है यह किस पुस्तक में लिखा है कि कालेरंग का पॉलिस्टर ही पहना जायेगा।
        जाकिर नाइक को हिन्दू भी बुद्धिजीवी माना परिणाम बांग्लादेश विस्फोट और लंका विस्फोट में जिहादी और भड़काने का आरोप ,फिर भी भारत दोषी है अब तो मुस्लिम देश मलेशिया ने भी रोक लगा दी।
        मैं एक पुस्तक लिख रहा हूँ हो सकता है निकट भविष्य में पूर्ण हो जाये। क़ियामत की ओर मुसलमान। पिछले कई बरस से देख रहा हूं कोई हिम्मत नहीं करता मुस्लिम को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने है टोपी,लुंगी,दाढ़ी,बुरखा,धार्मिक शिक्षा और कट्टरता यही है बाकी?
        तुर्की में 1920 में एक युवा उठा जिसे अतातुर्क मुहम्मद कमाल पाशा कहते है उसने कट्टरता और धार्मिक पहचान पर प्रतिबंध लगाया यहाँ तक नमाज भी बाहर खुले में पढ़ने पर उसने यह भी कहा मुझे 98% एशिया वाली तुर्की नहीं चाहिए 2% यूरोप वाला चाहिए। और कहा नारी और पुरूष विदेश आधुनिक शिक्षा के लिए जाय नारी पुरुष और पुरुष नारी विदेश से ले आये। जिसको तुर्की में बरीयता दी जायेगी।
        आज भी तुर्की की इकॉनमी मुस्लिम देशों में सबसे बड़ी ही होगी। एक महत्वपूर्ण प्रश्न क्या तुर्की मुस्लिम देश नहीं रह गया ? आज वहाँ भी कट्टरपंथ हावी हो गया।जैस्मीन क्रांति हुई जरूर 2011 में इस्लामिक देशों में लेकिन उसका लाभ कट्टरपंथी ही उठा पाये लिबरल किनारे ही पड़ा रहा गया। कमल पाशा को
        तुर्की के गांधी भी कहा जाता है सैनिक तानाशाह था।
        मैं मुस्लिम नही हूँ लेकिन बचपन से कुछ रूहानी कहानियां सिंदबाद जहाजी,अलादीन,उमर,अली,और शहजाद शहजादी की पढ़ी है बहुत से सूफी संतों की
        औलिया,खुशरो की।
        गोरी सोये सेज पर मुख पर डाले केश
        चल खुशरो घर आपने रैन भयी चहुँ देश

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      9. सही कहा आपने इस्लाम का फ़िरक़ों में विभाजन में सुधार पर प्रयास जारी हैं यदि मुसलमान सही दींन को फॉलो नहीं कर रहा तो ये उसकी कमी है इस्लाम की नहीं टोपी , लुंगी दाढ़ी बुरखा सुन्नतें हैं फ़र्ज़ नहीं !अपनी सत्तर को छुपाने का हुकुम है कलर और की कोई पाबंदी नहीं बुरखा किसी भी रंग का और किसी भी कपडे का हो सकता है !मलेशिया के रोक लगाने से अबतो आपको समझ आ गया होगा की सच्चा मुसलमान गलत का साथ नहीं देता दूसरी बात अगर ज़ाकिर नाइक उग्रवादी विचारधारा रखते हैं तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा हे या नहीं !आप जो किताब लिख रहे हैं उसकेलिये बधाई मगर आप ये नहीं कह सकते की मुसलमान आधुनिक अथवा वैज्ञानिक नहीं है !मुस्लिम्स कितने इनोवेटिव और साइंटिफिक थॉट रखने वाले है ये तो हमारे मिसाइल प्रोग्राम से ही समझ आ जाता है !

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      10. वही जब भारत ने रोक लगाई तो यही के मुस्लिम सोसल मीडिया पर तरह तरह से बचाव करते नजर आ रहे थे यूट्यूब का लिंक भेज रहे थे वो तो लंका में विस्फोट में नाम आने पर वांछित बनाया गया।
        मैं आपको गुजरात का बकाया बताता हूं नरोदा पाटिया का मेरी गाड़ी का ड्राइवर संयोग से मुस्लिम था मैंने जैसे बोर्ड में देखा तो पूछा यह वही दंगे वाला बाजार है तब बताया हा यह भी कहा सर यहाँ दंगे के पहले रोज लड़ाई झगड़ा गोली मर्डर होते थे लेकिन फिर आया गुजरात का शेर मोदी सब ठीक कर दिया बाजार एकदम शांत और गुजरात मे आज तक दंगे नहीं हुए यह मार्च 2014 की बात है मैं जस्टिफाई नहीं कर रहा एक आपबीती मुस्लिम ने जो बताया वही कहा हूँ।
        रही रोक लगाने की बात तो हाफिज सईद पर क्या पाकिस्तान ने रोक नहीं लगाई। इससे न्याय नहीं कह सकती । कितने प्रतिशत आधुनिक है कितने मुस्लिम के आदर्श कलाम साहब है कई कट्टरपंथी उन्हें मुस्लिम ही नहीं मानते क्योकि वह कुरान के साथ रोज गीता भी पढ़ते थे। सोचने वाली बात कालम साहब से किसी मुस्लिम को भारत मे दिक्कत नहीं हुई आखिर क्यों? उन्होंने भारतीय संस्कृति को स्वीकार किया था भारत को मजबूत करने और लोगों को सीखाने में पूरा जीवन अर्पण कर दिया। तो क्यो भारतीय मुस्लिम कलाम साहब की तरह बनते। वह भी बहुत गरीब परिवार से थे जिन्हें पढ़ाने के लिए बहन से सारे गहने बेच दिये थे। पाकिस्तान के a q खान,महबूब हक हो या बांग्लादेश के नोबल विजेता मोहम्मद यूनुस यह मुस्लिम में चर्चा में नहीं रहते है। आखिर मसला क्या है??

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      11. देखिये सोशल मीडिया में अधिकतर टीनएजर्स ही ऐसे बेतुके मामलो को तरजीह देते हैं बाक़ी समझदार और सुलझे हुए और उदारवादी विचारधारा रखनेवाले लोग ऐसी किसी चीज़ को बढ़ावा नहीं देते जिससे माहौल खराब हो ! कुछ के साथ हुआ गलत बर्ताव हज़ारों लाखों लोगो पर नकारात्मक प्रभाव डालता है !आपने कहा दंगे के पहले जिस बाजार में रोज़ लड़ाई होती थी मोदी जी ने वहाँ शांति स्थापित करा दी अब आप ही बताईये उस क़ीमत पर लड़ाई झगड़ा कोन चाहेगा गोधरा में जो कुछ हुआ शासन एवं नाकामी का परिणाम था !वैसे मैं आपको बता दूँ की न ही मैं मोदी जी के पक्ष में हूँ न ही विपक्ष में एक मानवतावादी दृष्टिकोण से गलत को गलत बोलती हूँ बस !देखिये अंत में में केवल इतना ही कहना चाहूंगी की जब पांचो उंगलिया ही बराबर नहीं होती तो व्यक्ति कैसे सामान हो सकते हैं ये समस्या तो हर धर्म में देखि जा सकती है यह व्यक्तिक अंतर बहुत हद तक व्यक्ति के परिवेश ,लालन पालन, पारिवारिक व सामाजिक वातावरण आदि पर निर्भर करता है हमारे कई पारिवारिक और निजी हिन्दू मित्र हैं हम लोग एक साथ उठते बैठते हैं और एक प्लेट में खाते हैं !परिवार व समाज किसी को कोई आपत्ति नहीं है !और वैसे भी मित्रता जाट बिरादरी के आधार पर नहीं होती !समस्या एक दुसरे से सबको नहीं है समस्या है कट्टरवादियों को कट्टरवादियों से जहां कोई किसी से कम नहीं !

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      12. मोइनुद्दीन चिश्ती,शेख सलीम चिश्ती, मुहम्मद गौस,निज़ामुद्दीन औलिया,अमीर खुसरो और बहराइच की दरगाह और हाजी अली भी गया हूं ।इसमें कई जगह एक से अधिक बार, हिस्ट्री का स्टूडेंट हू लगभग भारत घूमा हू ,सलमान रश्दी,तस्लीमा नसरीन,सलाम आजाद,मौलाना कलाम और अब्दुल कलाम के कई इस्लामिक बुक पढ़ा हूं बहुत से मुस्लिम दोस्त और सहेली रही है। मैं मुज्ज्मद करता हूं सुधार के लिए आपको वह कट्टरपन दिखता है।

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      13. धन्यवाद मगर फिर भी मैं यही कहूँगी की अपने पिछले पोस्ट्स पर नज़र ज़रूर डालियेगा जहां आपने कोटे किया था की मुस्लिम्स को भारत पर मुस्लिम आक्रमंन्द के लिए मुआफी मांगनी चाहिए !मैं आपकी बात से सहमत हूँ गलती के लिए मुआफी मांगनी चाहिए मगर क्या यहां ये बात विचार करने योग्य नहीं है की वह साम्राज्य विस्तार की लड़ाई थी और उस वक़्त वैसे भी राजतंत्र था !और उनके बाद ब्रिटिशर्स ने जो हाल किया वो भी किसी से छुपा हुआ नहीं है !एक दुसरे पर दोषरोपड करना हल नहीं है इसका हल है वर्तमान में जीना !और हाँ आप ने मुझसे बोलै था की मुझे अपने आर्टिकल पर विचार करना चाहिए !आपको कहाँ ऐसा लगता है की किन्ही गलत विचारों की अभिव्यक्ति की गयी है ?

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      14. जगह जगह तो आप मुस्लिम औरा में चली जाती है सेकुलर की बात करते हुये भी अतिवाद। जिस साम्रज्य की लड़ाई की बात
        कर रही उसमें धर्म को छेड़ा गया अयोध्या ,मथुरा ,काशी जब तक नहीं सुलझते और जो इसे नहीं जानते या जिनका इससे मतलब नहीं वहाँ तक ठीक है। भारत एक सांस्कृतिक मूल्यों वाला देश है ।इस लिए यह सोचना की वह पुरानी बात है तो अंधेरे में रहना है। अंग्रेजो को किसने माफ किया कभी जब समय आयेगा वह भी सबक सीखेगा। आप ने साम्राज्य विस्तार कहा ,अंग्रेजो ने कई गलतियों के लिए माफी मांगी है वह भी कह सकता था युद्ध कौशल से जीता जो जरूरी था गोली चलवाया। प्रेम समर्पण से पैदा होता है जब दोनों की इच्छा एक हो जाती है। नहीं तो किसने और साल बाद भी गांव में टोले और शहर में मुहल्ले बटे रहेंगे।

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      15. रही आरोपित करने की बात तो हम आपको स्वतंत्र विचारक समझ चर्चा किये थे जब मन मे आपके कट्टरपंथ बसता है ।इस आगे से कोई प्रतिक्रिया नहीं जायेगी।।

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      16. कट्टरपंथ किसके विचारों मैं है मेरे या ?मेरा लालन पालन धार्मिक कट्टरता वाले माहौल में नहीं हुआ में आपसे पहले भी बोल चूकि हूँ की मेरे लिए किसी धर्म विशेष से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत विचार हैं बातचीत में शालीनता होनी चाहिए और ये तब आती है जब वैचारिक दृष्टिकोण महत्वपूणा हो न की धर्म !धन्यवाद 🙏

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      17. क्या वह है? यह विचार अपने पर भी करना पड़ता है । पहले मुझे लगा था कि आपके लिए विचार महत्वपूर्ण है किंतु वह बाद में पता चला कितनी सफाई से गलत नीतियों को डिफेंड किया आपने 42वे संविधान संशोधन को जो इमरजेंसी की भूल है जो संविधान के साथ धोखा था। जिसने राष्ट्रपति के पद में शक्ति डाली जा रही थी

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      18. आपके विचारों के कारण मैंने बात किया ,मुझे अंत:करण का कहा पता था ।खैर आपने निराश किया कही कही अपमान भी। आगे से msg पूरी तरह से बंद,कोई रिप्लाई नहीं चाहिए क्यों छुपी पीर पता चल जाती है कि सही वाली भावना क्या है।जो आर्टिकल लिखा है इस पर विचार करियेगा। plz sorry🙏🙏

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      19. मेरा उद्देश्य आपका अपमान करने का कदापि नहीं था !आपका अतिवादी दृष्टिकोण आपको एक काल्पनिक औरा से निकलने नहीं दे रहा है हम किसी से बात सकारात्मक विचारों के आदान प्रदान के लिए करते हैं नेगेटिविटी के लिए नहीं अपमान तो आप करने की कोशिश कर रहे है मेरी कभी धार्मिक आधार पर ,कभी आतंकवाद के नाम पर , कभी कांग्रेस का हिमायती होने के आधार पर, तो कभी हिन्दू राष्ट्र घोषित करने के आधार पर ! मेरे आर्टिकल में कहाँ कट्टरवाद झलकता है यदि आप बता देते तो मेहरबानी होती !मेरी मंशा आपका अपमान करने bilkकी उल नहीं थी यदि मेरे विचारों से पकी भावनायें आहात हुई हों तो 🙏🙏

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  2. फिर एक आरोप कांग्रेस की नीतियों को डिफेंड करने का !देखिये कांग्रेस का एक लम्बा इतिहास रहा है !हेर पार्टी अपने निजी स्वार्थ लेकर चलती है कांग्रेस भी उनसे अछूती नहीं रही हाँ मगर बीजेपी ने तो सारे रिकॉर्ड ही तोड़ दिए !आपके हिसाब से या बीजेपी के हिसाब से संविधान संशोधन को पलटना सही है तो बेहतर यही होगा की पहले संशोधन करले फिर स्टेप ले !यधपि परिणाम भयावह हो सकते हैं सरकार में लोगों की निष्ठां समाप्त हो जाएगी सामाजिक असमानता में वृद्धि होगी और देश की एकता व अखंडता खतरे में आजायेगी !में किसी राजनीतिक पार्टी की प्रतिनिधि नहीं हूँ यदि कांग्रेस ऐसे स्टेप लेती तो उसके विरुद्ध भी मेरी यही राय होती !

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    1. विल्कुल संविधान को मूल में वापस जाना पड़ेगा इमरजेन्सी में धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद की क्या आवश्यकता पड़ गई। जब नेहरू जी स्वयं समाजवादीअर्थव्यवस्था को स्वीकार किया था देश पंथनिरपेक्ष पहले से था धर्मनिरपेक्षता का गाँधीजी ने विरोध किया था। इमरजेंसी पर एक बुक है DP धर की जो इन्ही के सचिव थे एक बार पढ़ियेगा। जमामस्जिद के इमाम को घसीटते हुये संजय ग़ांधी के आदेश पर ले जाया गया था जामा मस्जिद के तुर्कान गेट को तोड़ना हो या नसबंदी जो खेतो में भी लिटाकर जबरजस्ती कर दिया जाता था। क्या इन्ही सब के लिए शब्द जोड़े गये थे। ज्यादातर मुस्लिम धर्म को लेकर यूटोपिया में है और राजनीति को लेकर भयंकरित है। सामाजिक एकता सिर्फ कुछ स्तर पर रही है सम्प्रदायिकता का इतिहास है भारत में मोपलाओं,बहावी से लेकर बंटवारे फिर समय समय पर भिमण्डी,भागलपुर,मुम्बई,गुजरात में 86,87,89,93,2002 में हुये एकता होती तो ये सम्पदायिकता क्यों होती। बाकी इस समय आंतरिक सुरक्षा पर जो काँग्रेस का स्टैंड है वह सबसे पुरानी पार्टी को चुनाव दर चुनाव नष्ट कर देगा।क्योकि जतिवाद के नाम पर 30 साल सत्ता सुख लिया गया। अब राष्ट्रवाद का नया विकल्प खोजना होगा। चुनाव बेरोजगारी पर नहीं जीते जाते ।

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      1. देखिये मैं सब जानती हूँ !साथ ही यह भी जानती हूँ की राजनीती किसी की सगी नहीं होती !यदि मैं ये कहूँ की साम्प्रदायिकता का जवाब आतंकवाद से दिया जाता है तो आप कहेंगे में अतिवादी हूँ मेरा झुकाव इस्लाम की तरफ है मगर यक़ीन मानिये यही एक सच है जब तक हम सांप्रदायिक सौहार्द उत्पन्न नहीं हो जाता तबतक ये समस्याएं ज्यों की त्यों खड़ी रहेंगी दुसरे रही आंतरिक सुरक्षा पर कोंगरी के स्टैंड की तो इस विषय पर तो हर पार्टी एक मत रही अब अगर राष्ट्रु के नाम पर लोगों के मौलिक अधिकारों के हनन की तो इस विषय पर तो कोई भी प्रश्न उठाएगा !कई मानवतावादी संगठन मेरे और आपके जैसे आम नागरिकों के मन में जब यह प्रश्न है तो फिर विपक्ष तो विपक्ष ठहरा !

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      2. यह बिल्कुल गलत है सम्पदायिकता का जबाब आतंकवाद से तो ध्यान दीजिये सम्पदायिकता दो धर्म के बीच होती है।
        अब पाकिस्तान में कौन आतंकवादी है जो बम फोड़ता है मस्जिद में स्कूल में यही हालत अफगानिस्तान,इराक,यमन,सीरिया नाइजीरिया में है।आप यही मुस्लिम की जिहादी सोच की गिरफ्त के प्रभाव में आ जाती है। क्या आतंकवाद से मुसलमान कुछ पाया पूरे विश्व में सिर्फ इस्लाम को बदनाम किया और सामने वाले को शंका की दृष्टि से देखने को विवश किया। आतंकवाद की मुज्जमत कीजिये नहीं तो ये इस्लाम को खा जायेगा। दूसरे यदि हम दूसरे के साथ रहना और सम्मान करना सीख ले तो समस्या खत्म हो जायेगी। लेकिन आज के जो मौलाना है ज्यादातर उनकी तकरीरे सुनिये माशाल्लाह! भ्रमित कर देगा , जो मिलाद में भी तकरीरे दी जाती है कैसे हिन्दू इस्लाम की अच्छाई जान कर मुसलमान हो गया। मैं कई जमात में शामिल हुआ सब का एक ही सोचना की मैं मुसलमान बनाना चाहता हूँ। यह मूर्खतापूर्ण हरकत गाहे बगाहे सुनी आप भी होगी।

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      3. मैंने जो कहा उसे मूल में जाकर देखिये यहां मैंने साम्प्रदायिकता को कोटे अवश्य किया था परन्तु वास्तविकता उसके मूल में है और मूल यह है की जब भी किसी के अधिकारों का हनन किया जाता है या जब अन्याय हद से बढ़ जाता है तो परिणाम स्वरुप इस तर्हां की घटनायें देखने को मिलती हैं !इसी लिए मेने सांप्रदायिक सद्भाव की बात की थी !बात रही जिहाद की तो जेहाद का वह अर्थ है ही नहीं जिन अर्थों में इसे लिया जाता है जेहाद का अर्थ है जद्दोजहद करना !मैंने पहले भी कहा एक करता है भुगतना सबको पड़ता है !मैंने आतंकवाद को बढ़ावा कभी नहीं दिया मैंने केवल एक छोटे से उदाहरण से स्पष्ट करने का प्रयास मात्रा किया था !में इस विषय पर भी अपने विचार पहले ही रख चुकी हूँ की धैर्य ,सहिष्णुता ,परस्पर विश्वास इन सब के बिना एक दुसरे का सम्मान कैसे होगा !पंडित और मौलवी मुल्ला तो केवल स्व श्रेष्ट्रता का ही पाठ पढ़ाते हैं मेरा पोस्ट ध्यान से पढियेगा” झोला छाप डॉक्टरों से सावधान”;उसमे किसीका नाम न लेकर वर्तमान की इसी समस्या पर विचार किया गया है !

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      4. उसी जिहाद को देवबंदी का विचार देखिये जो कहता है धर्म के लिये,उसके प्रचार के लिए मर जाते हो तुम्हे जनन्त मिलेंगे।काफिर को कुरान की शिक्षा दो ये नेक काम है ये सहिष्णुता है। लाइन वही गलत है जब इस्लाम ले लिए मनुष्य कहा जाता है जबकि मनुष्य के लिए इस्लाम कहा जाता तो निश्चित ही अच्छा होता।रबिया कहती है खौफ खाओ अल्लाह से ये पंक्ति ही काट दो बल्कि प्रेम करो अल्लाह से।
        पंडित कट्टरता नहीं सिखाता न ही कहता है कि जान दे दो धर्म के लिए वह कहता है सेवा करो लोगों की धर्म की। अधिकार तो कश्मीरी पंडित के गये कितने आतंकवादी बन गये। खेल के नियम एक होंगे तो वह साम्राज्य विस्तार कैसे हो सकता है जो आप अपने लिए चाह रहे हो वही दूसरे आप से चाहे तो वह गलत नही हो सकता है। हिन्दु किसी से धर्म परिवर्तन को नहीं कहता है।

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      5. यहां धर्म के प्रचार के लिए मर जाओ तो जन्नत मिलेगी से तात्पर्य है कि जो तुम्हें पता है वह तुम दूसरों को बताओ ताकि लोग सही रास्ते पर चल सके अर्थात कुरान हदीस के अनुसार जीवन यापन कर संसाधनों की कमी में भी एक संतुष्टि पूर्ण जीवन व्यतीत कर सकें !क्या आप काफिर का मतलब मतलब जानते हैं ?काफ़िर से तात्पर्य नास्तिक व्यक्ति से है यह तो हम सभी जानते हैं कि जिसकी ईश्वर में श्रद्धा ना हो वह व्यक्ति से प्रेम क्या करेगा !इस प्रकार व्यक्ति जब उड़ान को उसकी डिटेल में पढ़ लेता है तो उसके वास्तविक आदेशों को समझने लगता है तो उसमें धैर्य उत्पन्न हो जाता है,अच्छे बुरे का तमीज आता है समझ बूझ बढ़ती है और जो अपने धर्म को वास्तविक अर्थों में जानता है वह किसी अन्य के धर्म की आलोचना आदि नहीं करता यही चीज़ आगे जाकर सहनशीलता का रूप धारण कर लेती है !बिल्कुल खूब शब्द का प्रयोग इसलिए किया जाता है कि जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मुस्लिम्स पर कुछ चीजें फर्ज बनाई गई है जैसे नमाज़, रोज़ा ,ज़कात ……….आदि यह सब धर्म से जोड़ने के कारक हैं जिनके पीछे विश्वास यह है कि यदि व्यक्ति ऊपर वाले के संपर्क में रहता है तो वह किसी भी गलत काम से डरता है और इससे समाज में एक संतुलित व्यवस्था बनी रहती है !देखिए आप फिर आप पुराण में भी अपने हिसाब से फेरबदल करने की कोशिश कर रहे हैं !जो आपने कहा खौफ के स्थान पर प्रेम को जोड़ दो !क्या आप जानते हैं ऊपरवाला अपने बंदों से कितनी मोहब्बत करता है ?70 माओं के बराबर !बाक़ी No comment on religion plz.क्योंकि जब आप कुछ बोलेंगे तो मैं भी कुछ बोलूंगी आपका अपना तरीका हो सकता है परंतु मैं किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं चाहती !आप पूरे डिस्कशन को ऊपर से नीचे तक देख लीजिए शायद ही मैंने हिंदू धर्म की आलोचना की हो ! बाक़ी आप स्वतंत्र हैं सवाल पूछने के लिए और मैं स्वतंत्र हूं उत्तर ना देने अथवा न देने के लिए !🙏

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      6. ये सही है काफिर की यह व्याख्या उस समय की गई थी और उनसे जजिया के नाम पर टेक्स भी वसूला जाता था !देखिए यह सब राजतंत्र के समय की बातें हैं किसको अपने कोर्स को कैसे भरना है यह निर्धारित करने का अधिकार केवल राजा का ही हुआ करता था !आज के संदर्भ में जजिया अपनी प्रासंगिकता पूरी तरह खो चुका है क्योंकि आज हम एक लोकतांत्रिक समाज में रहते हैं !जिस चीज की जैसी व्याख्या की गई है उसे उसी रूप में प्रस्तुत किया जाएगा !इस्लाम में जो कहा गया है मैंने उसी के अनुसार आपको स्पष्ट किया है !धन्यवाद 🙏

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      7. हमारा काम लोगों को सही मार्ग पर चलने के लिए उनकी सहायता करने का होना चाहिए !आज दो दिनों से धर्म धार का खेल चल रहा है में बिना किसी दुर्भावना के कह रही हूँ की इस समय की सदबक्से बड़ी समस्या है भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराते बादल और अन्य सामाजिक मुद्दे हैं उन पर ध्यान देना देना अभी की सबसे बड़ी आवशयकता है !!!🙏🙏🙏!!!

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      8. हा हा … अर्थव्यवस्था बहुत चिंता का सबब नहीं है चिदम्बरम इंडिया का सबसे बड़ा घोटाला किया है जाली नोटों ,मायाराम के साथ मिलकर आज पाकिस्तान का दिवाला निकल गया तो वही नोटबन्दी ही थी जिसे भारतीय विपक्षी बेकार माने थे। एक बात का इत्मीनान होना चाहिए कि भारत को एक कर्मठ ईमानदार और काम करने वाला pm मिला है जो अभी स्वीकार नहीं कर पा रहे वह बाद में करेगे । world GDP और इकोनॉमिक कंडीशन देखिये ,निर्मल सीतारमन जी बहुत योग्य ईमानदार है बहुत ज्यादा शोर मचाने से सत्य नहीं बदल जायेगा।

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  3. उनके सभी लेखन में, यह मेरा सबसे बड़ा ध्यान देने योग्य है। उनका अफसोस जिसके साथ वह अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपने अधिकारों की रक्षा करता है, सराहनीय है। उसकी सभी अवधारणाएँ मान्य हैं और वह निर्णय लेने में सही रास्ता अपनाने के लिए दूसरों को समझाने के लिए बहुत साहस के साथ इसे स्वीकार करता है। इस पढ़ने से मुझे आपके राष्ट्र के राजनीतिक जीवन के बारे में पता है। और मैं आपके साथ हूं, संघ में ताकत है।

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