life, shayree, Society

“कुछ समझी कुछ समझ न आया !”

अल्फ़ाज़ों का ये सरमाया !

कुछ समझी कुछ समझ न आया !

दरिया में -होती है रवानी !!

देता है गंध -ठहरा पानी !!

कब छूटा -हाथों से साहिल !!

कब ठहर गया -कोई ज़ख्म पुराना !!

कुछ समझी -कुछ समझ न आया !!

ख्वाबों का -ये सरमाया !!!

कुछ समझी -कुछ समझ न आया !!!

कुछ भूली -बिसरी बातें !!!

कुछ ख्वाब हैं -सच कुछ बातें !!!

तक़्दीरों के -खेल निराले !!!

सच कहीं -नज़र न आया !!!

कुछ समझी कुछ -समझ न आया !!!

सोचों का ये सरमाया iv

कुछ समझी कुछ समझ न आया iv

रोते -रोते हंस देते हैं iv

हँसते -हँसते छलके आखें iv

मामूली ये बात है लेकिन iv

मुश्किल है ग़म वो भूलाना iv

कुछ समझी कुछ समझ न आया iv

27 विचार ““कुछ समझी कुछ समझ न आया !”&rdquo पर;

  1. जिंदगी अबूझ पहेली है। ख्वाबों की दुनियाँ निराली। कुछ बोल भी जिसे समझना आसान नही। बढ़िया लिखा है आपने। लेख के साथ साथ कविता भी👌👌

    Liked by 1 व्यक्ति

    1. धन्यवाद , मधुसूदन जी !😊
      जीवन में घटित घटनायें ही एकमात्र सत्य हैं बाक़ी सब असत्य और सफल जीवन का रहस्य सत्य के साथ आगे बढ़ने में ही है !

      Liked by 1 व्यक्ति

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