personality development

“जुबां जैसे शहद !”

कभी गुलशन कभी सेहरा !

कभी चलता -कभी ठहरा !

ये तमाशा क्या है !

बुलबुला पानी का है – इंसा क्या है !

आईनो का शहर -है ,आईना हर सू !!

फिर ये छुपना -छुपाना क्या है !!

बुलबुला पानी का है -इंसा क्या है !!

बोल अनमोल ,जुबां -जैसे शहद !!!

फिर ये दिल में छुपा – ज़हर क्या है !!!

मामला है ये तुम्हारा -हमारा क्या है !!!

बुलबुला पानी का है -इंसा क्या है !!!

मैं बड़ा हूँ ,ये बड़ा क्यों -अहम् रहता है iv

आजिज़ी से भी मिलूं -तो वहम रहता है iv

मुझमे ऐसा भी -खुदारा क्या है iv

बुलबुला पानी का है -इंसा क्या है iv

12 विचार ““जुबां जैसे शहद !”&rdquo पर;

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