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"इंतज़ार न कर !"

सदैव मन की सुनें

क़ल्ब तेरा – खुद ही क़ासिद !
किसी रहबर का – इंतजार न कर !!

तोड़ के – रिवायत !
उड़ पंखों का – इंतजार न कर !!

कर जूनूं – खुद में पैदा ,कोई शिद्दत !
कोई आए, दे रफ्तार – इंतजार ना कर !!

राब्ता, सबसे रख – बढ आगे, भूल के रंजिश !
तू ही, कर पहल – और का, इंतजार ना कर !!

कर तख्य्यल ऐसा – कि तसव्वुर – सच हो !
किसी मुआज्जजा का – इंतज़ार न कर !!

अर्थ

क़ल्ब ———— दिल/मन
क़ासिद ——— संदेश वाहक/संदेश लेने वाला
रहबर ———- मार्ग दर्शक/लीडर
रिवायत ——- परंपरा
जुनूं ———– महत्वाकांक्षा /अभिलाषा
शिद्दत ——– तीव्रता
राब्ता ——— मज़बूत लगाव
रंजिश ——— दुश्मनी
तखय्यल ——- कल्पना शक्ति
तसव्वुर ——— कल्पना
मुअज्जजा —— चमत्कार

40 विचार “"इंतज़ार न कर !"&rdquo पर;

  1. उत्कृष्ट पोस्ट: सिर्फ अपने दिमाग को खुश करने के लिए अपने दिल की आवाज सुस्त मत करो
    के रूप में यह अतिविचार और सही होने की इच्छा में फूल जाता है
    अपने भीतर के दीपक की रोशनी पर स्विच करें।
    अपने दिल को सुनो ताकि आप अपनी आत्मा से महसूस कर सकते हैं
    अपने तर्क को फिट बनाने के लिए अपने दिल को डिस्काउंट न दें।

    क्रिस्टीन Evangelou, गुलाब में चट्टानों: जीवन सबक और व्यक्तिगत विकास के लिए प्रेरणा

    Liked by 3 लोग

    1. पोस्ट को इतनी गहराई से समझ कर उसे एक्सप्लेन करने के लिए , आत्मा को सर्वोपरि मानने के लिए, मनवा मस्तिष्क के मध्य संतुलन स्थापित करने के लिए, प्रेरणा का स्रोत मानने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !🙏🙏🙏

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      1. मेरी सपने वाली यात्रा🍀 धनंजय गांगेय
        🌴🌴🍁🌼🌱🌴🌱
        साउथ इंडिया की यात्रा पूर्ण हुई इसी के साथ भारत भ्रमण पूर्ण,चार धाम बद्रीनाथ,
        जगन्नाथ,द्वारका के साथ रामेश्वर,सप्तपुरियों में कांचीपुरम और मदुरै के साथ पूरी।

        चार मुख्य शहर दिल्ली,मुम्बई,कोलकाता के साथ चेन्नई भी देख लिया। इस यात्रा में 10000 km का कुल सफर रहा । ट्रैन, के AC,SL,Gen
        ,बसAC,स्पीड,Gen,कैब,टैक्सी और कोच्ची मेट्रो का भी।

        यात्रा में पहले प्रयागराज से चेन्नई का मरीना बीच और सेंट जार्ज फिर बेंगलुरु से हम्पी,तिरूपति बालाजी,कांचीपुरम,महाबलीपुरम,त्रिची,तंजावूर,मदुरै,रामेश्वरम,धनुष्कोटि,कन्याकुमारी,त्रिवेन्द्रम,त्रिशुर,कोच्चि,एर्नाकुलम से प्रयागराज।

        इस सपने जैसी यात्रा से बहुत कुछ सीखने,जानने,भगवान के दर्शन मिले। दो पूर्व प्रतिपादक अद्वैतवेदांत के आदि शंकराचार्य के जन्मभूमि कालाटी और रामानुजाचार्य की कर्मभूमि तिरुचिरापल्ली जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जीवन में आगे की ऊर्जा के लिए।

        पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न कलाम साहब के घर और उनकी समाधि ( रामेश्वरम) के भी दर्शन हुये। विष्णु और शिव में रमण करने का अवसर मिला।

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