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“झोला छाप डाक्टरों से सावधान !”

आजकल हमारे भारतीय समाज में एक विशेष फैशन चलन में है और वो है धार्मिक आधार पर व्यक्तियों के मस्तिष्क का EMI !करना जब से BJPसरकार क्या आयी ?मानो झोला छाप डॉक्टरों की बाढ़ सी आगयी है !ये लोगों के मस्तिष्क का ऍम. आर .आई आखों से कर लेते हैं और रोगी की तकलीफ को बिना कहे ही समझ लेते हैं !महाज्ञानी जो ठहरे !महाज्ञान के इस कुम्भ में हर कोई डुबकी लगा लेना चाहता है !एक ऐसी अधार्मिक डुबकी जो धर्म (सत्य )को धो दे !

जी हाँ मैं बात कर रही थी अखंड भारत का झूठा दम्भ भरने वाले राष्ट्रवादियों की !आज संकुचित एवं रोगी मानसिकता के साथ राष्ट्रवाद किस दिशा में जा रहा है जिसे देखो वही राष्ट्र का ठेकेदार बना हुआ है वास्तव में आजकल राष्ट्रवाद राष्ट्र हित से कम और निजी स्वार्थों से अधिक संचालित हो रहा है !

जब कांग्रेस की बात आती है तो राष्ट्रवाद बनाम वंशवाद में लड़ाई छिड़ जाती है , कभी राष्ट्रवाद बनाम जातिवाद का ,कभी राष्ट्रद्रोह बनाम राष्ट्रवाद ,कभी जय हिन्द बनाम राष्ट्रवाद , कभी जय मोदी बनाम राष्ट्रवाद कभी वन्देमातरम बनाम राष्ट्रवाद …………….? राष्ट्र वाद का इतना संकुचित द्रष्टिकोड आपलोगों ने पहले कभी नहीं देखा होगा जहां व्यक्ति को प्रत्येक क्षण अपने राष्ट्रवादी होने का प्रमाण देना पड़े वो भी ऐसे लोगों को जिनके लिए राष्ट्रवाद एक निजी संपत्ति हो गया हो अब अगर आप स्वयं को राष्ट्रवादी घोषित करना चाहते हैं तो इनसे प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा मानो राजनीती न हुई दलगत आतंकवाद हो गया !

समय रहते निकाल फेकिये संकुचित दृष्टिकोण को

हमारे संविधान की आत्मा से धर्मनिरपेक्ष व लोकतंत्र मानो समाप्त होने की कगार पर है और ये सब कुछ टूच -पुँजिये कम अक़्ल , कम पढ़े लिखे अथवा पढ़े लिखे जाहिलों का काम है !इन सिद्धांतों का मूल्य वह बुद्धिजीवी वर्ग जानता है जिसने इतिहास पढ़ा है स्वतंत्रता संग्राम और देश की आज़ादी के लिए जान गवाने वाले सपूतों की माओं-बहनो -बेटियों के दुःख दर्द को महसूस किया है !

यदि राष्ट्रवाद का बिगुल छेड़ना ही है तो धार्मिक सौहार्द के लिए छेड़िये ,विकास के लिए छेड़िये ,समाजवाद के लिए छेड़िये ,आतंकवाद के लिए छेड़िये अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर साख बनाने के लिए छेड़िये ,भ्रष्टाचार के विरुद्ध छेड़िये , लोकतंत्र की बहाली के लिए छेड़िये , धर्म निरपेक्षता के लिए छोड़िये …………………..!

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यह एक तथ्य आधारित सत्य है आप जिसपर जितना अविश्वास प्रकट करेंगे वह व्यक्ति उतना ही विद्रोही प्रवृत्ति धारण करता जायेगा !क्या हम भारतियों के प्रति अंग्रेज़ों के अविश्वास को भूल गए !याद रखिये अविश्वास की स्तिथि भ्रम उत्पन्न करती है और भ्रम ले डूबता है इस भ्रम से उत्पन्न तूफ़ान में सब घिर जाते हैं फिर चाहे वह वास्तु हो व्यक्ति अथवा सरकार !

सरकार शब्द में एक मत्वपूर्ण संकल्प निहित है !ये संकल्प है संविधान की आत्मा के स्वरुप को ज्यों का त्यों बनाये रखने का क्यूंकि लोकतंत्र का अर्थ जनता का जनता के द्वारा जनता के लिए किया जाने वाला शासन है न की” सरकार का सरकार के द्वारा सरकार के लिए किया जाने वाला शासन !”मूल ही वास्तविक सुगन्धयुक्त फूल है आत्मा में बदलाव शूल है !

में स्वयं पर कोई धार्मिक अथवा जातिगत बन्धन आरोपित करके एक व्यक्ति से भिन्न कुछ भी मानन्ना नहीं चाहती !मैं एक सामान्य व्यक्ति हूँ भारत की एक आम नागरिक ! याद रखिये हम सभी भारत के नागरिक है हमारी एकता में ही भारत की शक्ति है और हमारी शक्ति का प्रतीक है अखंड भारत !

हमारा देश संवेदनशील स्थिति से गुज़र रहा है एकता बनाये रखिये अगले ब्लॉग में फिर मुलाक़ात होगी तब तक के लिए हँसते रहिये -हसाते रहिये जीवन अनमोल है मुस्कुराते रहिये !

जय भारत

🙏🙏🙏

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” प्रतिबद्धता जीवन का आधार !”

कुछ रिश्तों सा कुछ नातों सा !

रिश्ता हर एक हे बातों सा

कुछ बह निकले पानी बनकर

कुछ जाये ठहर दर्द के जैसा !!

संबंधों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह

संबंधों की प्रतिबद्धता का होता समापन ! संबंधों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाता है !वास्तव में सम्बन्ध हैं क्या ?यही एक प्रश्न जिसे देखो उसी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है !आजके दौर में संबंधों ने जिस तेज़ी से अपने वास्तविक अर्थ को खोया है ,ज़रूरते जिस तेज़ी से संबंधों पर भारी पढ़ गयीं पता ही नहीं चला !

मन व मस्तिष्क का का भ्रम जाल

विकास ,प्रगति ,स्टेटस की झूठी व्याख्या और झूठा दम्भ वास्तव में मन व मस्तिष्क के झूठे भ्रम का ही परिणाम है !ये भ्रम व्यक्ति को एक ऐसी माया नगरी में ले जाता है जहां भटकाव और असंतुष्टि के अतिरिक्त कुछ नहीं होता और व्यक्ति एक लम्बी उम्र गुज़ार कर सालों की तिलांजलि देकर दशकों के बाद माया के उस भ्रम से निकल आता है !पर वो कहते हैं न ” अब पछतावे होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गयीं खेत !”

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प्रतिबद्धता की आंच संबंधों के शुद्धिकारन के लिए आवश्यक

संबंधों को विश्वास की कसौटी पर कसा जाता है जहां प्रतिबद्धता की आंच इन्हें शुद्ध बनाती है !प्रतिबद्धता अर्थात वादा !एक ऐसा वादा जो व्यक्ति स्वयं -स्वयं से करता हे !व्यक्ति का यही वादा उसकी इच्छा ,उसकी आकांक्षा ,उसका संकल्प बन जाती है !जो व्यक्ति के जीवन को एक दिशा प्रदान करती है !

प्रतिबद्धता जीवन के हर दौर में ज़रूरी है

विश्वास की एक डोर जो एक इस छोर तो दूसरी उस छोर संबंधों को बांधे रखती है !प्रतिबद्धता कोई पखवाड़ा नहीं हे जिसकी आवश्यकता एक समय विशेष पर विशेष रूप से हो यह तो जीवन के प्रत्येक क्षण में ज़रूरी है !जीवन के हर दौर में ज़रूरी है !

प्रतिबद्धता में कमी के परिणाम

प्रतिबद्धता की कमी रिश्तो में अविश्वास पैदा करती है जो भविष्य में खटास का कारन बनती है !अविश्वास संबंधों का एक ऐसा प्रतिबिम्ब प्रदर्शित करता है जो वास्तव में होता ही नहीं है , एक ऐसी सोच को जन्म देता है जो सोच का विषय ही नहीं है , एक ऐसे घाव का अनुभव करता है जो चोट है ही नहीं !

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जीवन नीरस ,निराशापूर्ण व असंतुष्ट मन ,चिन्तनमयी मस्तिष्क जीवन को डावाडोल बना देता है सुख का लोप व संतुष्टि का अंत हो जाता है !सोच विचार की शक्ति क्षीड़ हो जाती है !द्वन्द में उलझा व्यक्ति न घर का रहता है न घाट का सम्बन्धो की डोलती नैया जीवन के सुख चैन को ले डूबती है और हिस्से आता है संताप और घृणा कभी लोगो से तो कभी अपने आपसे !

सम्बन्धो में विश्वास उत्पन्न कीजिये संबंधों का आनंद लीजिये अगले ब्लॉग में फिर मुलाक़ात होगी तब तक हाँहते रहिये हसते रहिये जीवन अनमोल है मुस्कुराते रहिये !

धन्यवाद !

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