swatantra astitva
सोशल ईविल, beauty, humble ,kind and polite, life, Society

“स्त्री ,जो समस्त संसार का आधार है ! स्वयं निराधार कैसे हो सकती है?”

संसार में नारी को निसहाय निर्बल व अबला समझने वालों की कोई कमी नहीं है !नारी अबला नहीं है ,न हीं वह बेचारी है वह तो षड़यंत्र की मारी है! नारी को अबला प्रचारित या घोषित करना इस छदम पुरुषप्रधान समाज का एक दुस्साहस प्रयास मात्र है !प्रेम, मोह- माया व संबंधों के प्रति समर्पण ममता व करुणा के वशीभूत होकर उसने स्वयं ही अपनी प्रगति को बाधित किया है जो कि उसकी कोमल भावनाओं का प्रतीक है उसकी कोमलता से उसकी कमजोरी का अनुमान लगाना पूर्णतःअनुचित है !

महिलाओं के संदर्भ में इस गीत की पंक्तियाँ बहुत सटीक बैठती हैं
कोमल है कमज़ोर नहीं तू !
शक्ति का नाम ही नारी है !!
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beauty, life, personality development, Society

“सर्वोत्तम कौन चित्र या चरित्र ?”

चित्र का अर्थ

(Meaning of picture)

चित्र का अर्थ है सुंदर या कमाल का होना तात्पर्य यह हुआ कि सुंदर वस्तु के प्रति आकर्षण स्वाभाविक ही है यही कारण है कि चित्र को हमेशा खूबसूरत बनाने का प्रयास किया जाता है ,फेसबुक का पोस्टर हो,यूट्यूब का थंबनेल हो या किसी मूवी का पोस्टर हो या फिर विवाह प्रस्ताव के लिए पेश किया जाने वाला किसी लड़की का चित्र

सुंदरता का संकुचित दृष्टिकोण (Narrow view of beauty)

जिस प्रकार दर्पण में अपना प्रतिबिंब नजर आता है रोशनी में आप का साया नजर आता है ठीक उसी प्रकार चित्र से चेहरे की सुंदरता नजर आती है यह एक संकुचित दृष्टिकोण है जबकि वास्तविकता इसके बिलकुल विपरीत है चित्र के माध्यम से वास्तव में जेसे केवल चेहरे की सुंदरता का पता चलता है वास्तविक सुंदरता का नही जो की मन की होती है

पहली डिमांड सुंदरता है

(The first demand is beauty)

आज मन की प्रवाह कौन करता है सब तन के पुजारी हैं मैं यहां अपनी बात को एक छोटे से उदाहरण की सहायता से स्पष्ट करना चाहूंगी अधिकतर हमने देखा है कि जब लड़के वाले लड़की को देखने आते हैं तो लड़की की नुमाइश की जाती है उनकी पहली डिमांड तो सुंदरता ही होती है और फिर क्रमश: सोशल स्टेटस ,क्वालिफिकेशन ……….आदि इस आधे या 1 घंटे की मीटिंग में दोनों परिवार एक दूसरे को जानने का दंभ भरते हैं परंतु वास्तव में इतने समय में तो केवल चित्र ही देखा या खींचा जा सकता है !

अद्भुत सौंदर्य

(Stunning beauty)

वास्तव में चित्र और चरित्र दो अलग-अलग चीजें हैं यद्यपि एक में तन की सुंदरता समाहित है और दूसरे में मन की यद्यपि दोनों एक ही स्थान पर बहुत कम ही पाई जाती हैं और जब यह दोनों सुंदर ताएं एक ही स्थान पर समाहित हो जाती हैं तो ऐसा व्यक्ति विलक्षण एवं अद्भुत सौंदर्य का प्रतीक बन जाता है !

क्या लड़की विज्ञापन का सामान है

(Is the girl advertising stuff)

इस बात पर तो शायद ही हम में से कोई दो राय हो कि मार्केटिंग की जाने वाली चीजों के पोस्टर सुंदर होने ही चाहिए ,उन्हें बेचना जो होता है इस सम्बन्ध में एक कहावत प्रचलित है “जो दिखता है वही बिकता है !”

व्यवसाय की दृष्टि से तो यह कथन सत्य है परंतु लड़की क्या कोई सामान है ?जो उसकी नुमाइश इस तरह से की जाए ,यदि नहीं तो फिर इस की नुमाइश क्यों ?

चित्र उत्तम है

(Picture is better)

कुछ लोगों का मानना है कि आज के व्यस्त जीवन में समय की कमी के चलते चित्र को देखकर ही यह अनुमान लगा लिया जाता है कि कोई व्यक्ति उचित रहेगा अथवा नहीं अतः कम समय में चित्र के माध्यम से किसी के व्यक्तित्व का आकलन यदि कम समय में करना है तो चित्र ही उत्तम है !

चरित्र सर्वोत्तम है

(Character is best)

यद्यपि मैं मानती हूं कि कम समय में आकलन के लिए चित्र उत्तम है परंतु चरित्र सर्वोत्तम है इसलिए चित्र से ज्यादा चरित्र को महत्व दीजिए समय के साथ-साथ चित्र तो धुंधला पड़ जाता है वह चरित्र ही है जो लोगों को याद रह जाता है !

लोगों के दिलों पे राज करना है तो दिलों से रिश्ता जोड़िये ,अगले ब्लॉग में फिर मुलाक़ात होगी तब तक के लिए हँसते -रहिये ,हँसते- रहिये जीवन अनमोल है मुस्कुराते रहिये !

धन्यवाद

🙏🙏🙏