गाँधी जी
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” ये कैसा अभिमान है !”

एक महान विचारक

वनदे ,वनदे ,वनदे !

बने हम ऐसे बन्दे !

के दुनियां याद करे !

मेरे बाद करे !

दूसरों की खुशी से हो !!

खुशी हासिल !!

दूसरों के गम से !!

बह निकले !!

आँख का काजल !!

एक दुसरे का दर्द हो !!

ऐसा ज़माना आ जाये !!

वनदे , वनदे , वनदे !!

बने हम ऐसे बन्दे !!

की दुनियां याद करे !!

मेरे बाद करे !!

भूल तो होती रहेगी !!!

आखिर को इंसान हैं !!!

खून की होली खेले जो !!!

ये कैसा अभिमान है !!!

भगवान दे शक्ति हमें !!!

माफ़ करना आ जाये !!!

वनदे ,वनदे ,वनदे !!!

बने हम ऐसे बन्दे !!!

की दुनियां याद करे !!!

मेरे बाद करे !!!

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“उड़ते हैं परिंदे सब ….!”

एक ऐसा जहां हो !

जहां कोई न पशेमा हो !

हो हर कोई जहां अपना !

हर दिल में मुहब्बत हो !

ये मेरा इंडिया

मिले इंसा से जहां इंसा !!

रिश्ता है वही गहरा !!

ये हिन्दू मुसलमा क्या !!

हर दिल में चाहत हो !!

खुले आसमा में जैसे !!!

उड़ते हैं परिंदे सब !!!

एक साथ ज़मी पर यूं !!!

मिलेंगे यहां सब कब !!!

के चैन मिले दिल को !!!

और रूह को राहत हो !!!