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“दृढ व्यक्ति की यही पहचान होती है !”

जीवन एक प्रतियोगिता है और आप एक प्रतियोगी इसलिए बिना रुके चलते रहिये !

टूट कर -बिखर जाने की -कहानी !

बहुत आसान – होती है !

…………..

समेट लेना -खुद को विपत्ति में !!

दृढ -व्यक्ति की -यही !!

पहचान -होती है !!

…………

वो हस्ती -हो जिसे !!!

दर्द ,औरों की -पीड़ा का !!!

ढूँढना – शक्सियत ऐसी !!!

कहाँ ,आसान होती है !!!

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“जुबां जैसे शहद !”

कभी गुलशन कभी सेहरा !

कभी चलता -कभी ठहरा !

ये तमाशा क्या है !

बुलबुला पानी का है – इंसा क्या है !

आईनो का शहर -है ,आईना हर सू !!

फिर ये छुपना -छुपाना क्या है !!

बुलबुला पानी का है -इंसा क्या है !!

बोल अनमोल ,जुबां -जैसे शहद !!!

फिर ये दिल में छुपा – ज़हर क्या है !!!

मामला है ये तुम्हारा -हमारा क्या है !!!

बुलबुला पानी का है -इंसा क्या है !!!

मैं बड़ा हूँ ,ये बड़ा क्यों -अहम् रहता है iv

आजिज़ी से भी मिलूं -तो वहम रहता है iv

मुझमे ऐसा भी -खुदारा क्या है iv

बुलबुला पानी का है -इंसा क्या है iv