motivation, personality development, solution of a problem

“क्यूंकि डर के आगे जीत है !”

लक्ष्य निर्धारण की स्थिति

लक्ष्य के निर्धारण की स्थिति में मन उच्च मनोभावों का अनुसरण करता है तभी तो लक्ष्य के निर्धारण के साथ ही कुछ लोगों का व्यवहार यूं प्रतीत होता है मानो लक्ष्य का निर्धारण ना किया गया हो वरन लक्ष्य की प्राप्ति कर ली गई हो !जबकि वास्तव में लक्ष्य के निर्धारण और लक्ष्य की प्राप्ति में एक महत्वपूर्ण अंतर होता है एक में महत्वाकांक्षा त्मा सकारात्मकता और दूसरे में एक लंबे मार्ग को तय करने से होने वाली खीझ व थकन जो एक लंबे मार्ग से गुजरने के पश्चात होती है !

लक्ष्य प्राप्ति का डर और द्वन्द

लक्ष्य की प्राप्ति में एक लम्बे मार्ग का अनुसरण करना पड़ता है !यह एक लम्बा मार्ग है जिसमे कई बाधाओं को लांघना होता है जो व्यक्ति लक्ष्य का निर्धारण कर ‘होगा या नहीं ‘ के नकारात्मक द्वन्द में फंस जाता है और लक्ष्य के मार्ग में आने वाली बाधाओं से घबराकर हार मान लेता है उसके मन में नकारात्मकता का भाव भर जाता है उसके मन में एक डर बैठ जाता है एक ऐसा डर जो उसके लक्ष्य को मार्ग में ही निगल जाता है !

लक्ष्य प्राप्ति में संघर्ष का महत्व

इसके विपरीत जो व्यक्ति संघर्ष करते हुए बाधाओं को पार कर जाता है वास्तव में वही विजय श्री पाता है !इस प्रकार कहा जा सकता है की लक्ष्य व संघर्ष का अटूट सम्बन्ध है लक्ष्य के बिना संघर्ष और संघर्ष के बिना लक्ष्य का कोई मोल नहीं !

आपका लक्ष्य आपकी मनोभावना पर निर्भर करता है जो की किसी वास्तु अथवा व्यक्ति विशेष के प्रति मनुष्य में लालसा के रूप में विद्यमान रहता है !

लक्ष्य के रूप

लक्ष्य यथार्थ एवं आदर्श दोनों रूपों में पाया जाता है जिसका प्रभाव व्यक्ति पर अधिक होता हे उसका लक्ष्य भी उसी से अधिक प्रभावित रहता है !लक्ष्य चाहे यथार्थ आधारित हो अथवा आदर्श आधारित संघर्ष दोनों में विद्यमान रहता है !लक्ष्य एक स्वप्न की भांति होता है !

वास्तविक विजेता

स्वप्न तो हर कोई देखना चाहता है लक्ष्य के लाभ से लाभान्वित भी हर कोई होना चाहता है परन्तु लाभ केवल वही पाता है जो हानि की परवाह किये बिना आगे बढ़ जाता है डर जिससे हार जाता है वही विजेता कहलाता है !

हौंसला कीजिये आगे बढिये क्यूंकि ” डर के आगे जीत है !”अगले पोस्ट में फिर मुलाक़ात होगी तब तक के लिए हँसते रहिये -हंसाते रहिये जीवन अनमोल है मुस्कुराते रहिये !

धन्यवाद

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