personality development, safalta ke mool mantra

“कहीं आप के सुखों की चाबी भी किसी दुसरे के हाथों में तो नहीं ?”

खुशियां जीवन की प्रेरणा है

छोटी-छोटी खुशियों से खुश और छोटे – छोटे दुखों से दुखी हो जाना तो मानव जीवन की विशेषता है ,ये छोटी – छोटी खुशियां ही तो है जो हमें जिंदगी जीने के लिए प्रेरित करती हैं और जिसमें आने वाले कल की कल्पनाएं उत्साह भर देती हैं !

जो आप को महत्व देता है वह आपके लिए समय निकाल लेता है

एक सुखी और संपन्न जीवन का स्वप्न हर मानव मन की अभिलाषा होती है आज के इस व्यस्त दौर में किसी के पास समय नहीं है यह कहना तो उचित नहीं होगा क्योंकि समय किसी के पास नहीं होता ,समय तो निकालना पड़ता है यह तो पूर्णत: सामने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है जो आप को महत्व देता है वह आपके लिए समय भी निकाल लेता है ,और जो आपको महत्व नहीं देता उससे अपेक्षाओं का क्या महत्व………. ???

आज के इस दौर में हर कोई दुखी नजर आता है ,ऐसा इसलिए है क्योंकि हर व्यक्ति अपने सुखों का माध्यम किसी अन्य व्यक्ति को बना लेता है और इस प्रकार व्यक्ति अपने सुखों के लिए किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर हो जाता है और यहीं से उसके जीवन में दुखों का आरंभ होता है !जब आप मान लेते हैं कि आप ही सर्वोपरि हैं आपका सुख आपसे ही है वास्तव में तभी आप सुखी होते हैं!

आपके दुखों के लिए आप खुद उत्तरदाई हैं

इस प्रकार व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के हाथों की ‘कठपुतली’ बन जाता है तात्पर्य यह हुआ कि आप की खुशी उस अमुक व्यक्ति के व्यवहार की मोहताज हो जाती है और इस प्रकार आपका मूड स्विंग करता रहता है जब वह व्यक्ति आपसे हंस कर बात करता है तो आप सुख का अनुभव करते हैं और जब वह आपको इग्नोर करता है तो आप दुखी हो जाते हैं दरअसल इसके लिए उत्तरदाई वह व्यक्ति नहीं अपितु आप खुद हैं क्योंकि आपने अपने सुखों की चाबी किसी और के हाथों में जो थमा रखी है!

अंतर्मन को टटोलिये

वास्तविक सुख तो वह होता है जो आपके अंतर्मन से आए -जो किसी पर निर्भर ना हो, वास्तविक सुख तो आपके भीतर ही है आवश्यकता केवल उसे पहचानने की है ,क्या आपने कभी एकांत में बैठकर अपने अंतर्मन है को टटोलने की कोशिश की ? आपको खुशी किन चीजों से मिलती है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति के सुख की परिभाषा भिन्न भिन्न होती है यद्यपि परिस्थितियों के अनुरूप भावनाएं भिन्न हो सकती हैं परंतु मनुष्यत्व तो सब में एक समान ही है !

आपके भीतर सुषुप्त पडी खुशी को जगाइये

इस प्रकार प्रत्येक मनुष्य को सुख मिलता है प्रेम भाव से जो की स्वयं उसमें ही समाहित है , व्यक्ति को सुख मिलता है करुणा से जो कि मानव मन का एक विशेष भाव है ,व्यक्ति को खुशी मिलती है नारीत्व से जो कि प्रत्येक स्त्री की विशेषता ,व्यक्ति को सुख मिलता है पुरुषत्व से है जो कि समस्त मानव जाति का सार है मनुष्य से अर्थ यह हुआ कि आपकी खुशियों का स्रोत आप खुद हैं क्योंकि वास्तविक खुशी वही होती है जो अंतर्मन से निकले समस्त खुशीआपके भीतर ही सुषुप्त अवस्था में है यदि आवश्यकता है तो केवल उसकी पहचान करने की और सही समय पर सही उपयोग करने की है !

वास्तविक खुशी को पहचानिए

“अगर आप खुद से प्यार करते हैं तो समझिए कि आप खुश हैं ,है अगर आप खुद का सम्मान करते हैं तो समझिए कि आप खुश हैं,अगर आप अपनी खुशी के लिए किसी अन्य पर निर्भर नहीं रहते हैं समझिए की आप खुश हैं!”

वास्तविक खुशी आत्मनिर्भरता में है जब आप बिना किसी पर निर्भर हुए खुश रहने का हुनर सीख जाते हैं वास्तव में आप तभी खुश होते हैं!

अपने अंतर्मन को टटोेलिए खुश रहिए ,अगले अगले ब्लॉग में फिर मिलेंगे तब तक के लिए हंसते -रहिए ,हंसाते -रहिए ,जिंदगी अनमोल है मुस्कुराते रहिए !

धन्यवाद

🙏🙏🙏