personality development

“क्या परिपक्वता (Maturity)का सम्बन्ध आयु से है ?”

परिपक्वता :परिपक्वता (Maturity) एक वृहद शब्द है जिसका अर्थ है संपूर्णता अर्थात एक ऐसा नज़रिया जो अपने आप में पूर्ण हो परंतु यहां हमारे विचार का केंद्र बिंदु मनुष्य है और बात जब मनुष्य के संबंध में हो तो कहीं ना कहीं हमें यह मानने को विवश होना ही पड़ेगा कि व्यक्ति पूर्णतः संपूर्ण (परफेक्ट)हो ही नहीं सकता संपूर्ण तो केवल एक ही शक्ति है और वह है ईश्वर !

प्रगतिवादी विचारधारा :हम संपूर्ण तो नहीं हो सकते परन्तु पूर्ण होने का प्रयास तो कर ही सकते हैं कौन है जिसने जीवन में विषम परिस्थितियों का सामना नहीं किया ,या तो आप परिस्थितियों को दोष दे कर लकीर के फकीर बने रहिए या प्रगतिवादी (progressive)विचार धारा के साथ आगे बढिये ,परंतु यह याद रखिए आप के रुकने से समय नहीं रुकेगा इस सम्बन्ध में मार्टिन लूथर किंग जूनियर की ये पंक्तियाँ सदैव अभिप्रेरणा का स्रोत रही हैं

आप उड़ नहीं सकते हो ,तो दौड़ो

दौड़ नहीं सकते हो ,तो चलो

चल नहीं सकते हो ,तो रेगों

लेकिन तुम जो भी करो

तुम्हें आगे बढ़ना ही पड़ेगा

परिपक्वता का स्तर : किसी एक ही परिस्थिति विशेष में भिन्न-भिन्न व्यक्तियों का परिपक्वता का स्तर भिन होता है परंतु होता अवश्य है , हमारे प्रत्येक निर्णय में परिपक्वता का एक निश्चित अंश पाया जाता है हां यह जरूर है कि किसी निर्णय में इसका अंश 100% तो किसी में ०( शुन्य ) होता है , अर्थात दोनों के बीच का यह व्युत्क्रमानुपाती (उल्टा ) संबंध ही व्यक्ति की परिपक्वता का माप है दूसरे शब्दों में कहा जाये तो एक बुद्धिमान और दूसरा मुर्ख !

1. शांति पूर्ण व्यवहार

परिस्थिति -विश्लेषण -व्यवहार

2. आक्रामक व्यवहा

परिस्तिथि -व्यवहार

मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य :यधपि परिपक्वता मानसिक स्वस्थ्य की परिचायक है क्योंकि मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही उत्तरदायित्व का निर्वहन करने में सक्षम हो सकता है दायित्वों का निर्वाहन ना करने वाले व्यक्ति को ना तो मानसिक रूप से स्वस्थ कहा जा सकता है और ना ही भावात्मक रूप से स्वास्थ्य व्यक्ति ही जीवन -यापन के सिद्धांत निर्धारित कर सकता है अपना उद्देश्य निर्धारित कर सफलता अर्जित करने के तरीके निर्धारित कर एक सफल व्यक्ति बन सकता है !

परिपक्वता के लाभ :-एक परिपक्व व्यक्ति संघर्ष से उबरने का तरीका जानता है , कामयाबी पाने और जिंदगी जीने का हुनर जानता है ,वह सफलता -असफलता के प्रति दृष्टिकोण निर्धारित करने की क्षमता रखता है ,वह जीवन के प्रति एक वृहद दृष्टिकोण अपनाता है अंततः यथार्थ से जुड़कर एक सफल जीवन व्यतीत करता है !

कल्पना वास्तविकता के मध्य अंतर : मानव जीवन में सपनों व कल्पनाओं का एक विशेष स्थान होता है परंतु क्या कोरी कल्पनाओं से सपनों को साकार किया जा सकता है कल्पनाओं की उड़ान के लिए ईंधन की जरूरत होती है ,जो फ्री का प्रतीत होता है परन्तु हमारे कितने ही अनमोल क्षणों को अपने साथ जला बैठता है पता ही नहीं चलता जब इसका आभास होता है तब तक सब नष्ट हो चुका होता है !

आपकी समझ बूझ आप की परिपक्वता का ही एक भाग है और यह सब स्पष्ट होता है जब आप किसी परिस्थिति विशेष का सामना करते हैं !

परिपक्वता का माप :परिपक्वता (maturity)का वास्तविक अर्थ है यथार्थवादी (Realism)होना क्योंकि यथार्थ आपको सत्य के धरातल से जोड़े रखता है तब ना आप किसी से बड़ी – बड़ी आशाएं लगाते हैं और न उम्मीदों के टूटने पर खुद को असहाय महसूस करते हैं यह परिपक्वता अपने वास्तविक अर्थ ( Realism)में आपको कभी निराश नहीं होने देती साधारणत : कहां जाता है कि बढ़ती उम्र के साथ -साथ व्यक्ति की परिपक्वता में भी वृद्धि होती जाती है परंतु कई बार देखा गया है कि 8-10 साल के बच्चे समझदारी में 20-25 साल के युवाओं को भी पीछे छोड़ देते हैं !

परिपक्वता का स्रोत :प्रश्न यह उठता है की परिपक्वता आती कहां से है ?

कुछ ईश्वर प्रदत्त

कुछ संस्कारों से

कुछ अनुभवों से

परिपक्वता के विकास के कारक :-परिपक्वता के विकास में कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जैसे व्यक्ति की ,समझ उसका धैर्य ,उसका किसी स्थिति अथवा वस्तु को ग्रहण करने का तरीक़ा ,स्वभाव , उत्तरदायी व्यवहार ,आत्म नियंत्रण ,त्याग ,समर्पण सकारात्मक दृष्टिकोण, अच्छे मित्र ,चुनौतियों का सामना करना ,समझौता करना !

प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास के वातावरण व अपने आसपास के अनुभवों से सीखता है जैसी की प्रत्येक व्यक्ति की मंशा होती है कि हर कोई उसे मान -सम्मान दे इसके लिए दूसरे के दृष्टिकोण (point of view)को समझना भी जरूरी है हम हर पल किसी न किसी के संपर्क में रहते हैं और हर पल किसी न किसी से कुछ न कुछ सीखते हैं !

जीवन का मूलमंत्र :एक परिपक्व व्यक्ति संघर्ष से उबरने का तरीका जानता है एक सफल जीवन व्यतीत करता है और जीवन में आने वाली विफलताओं से घबराता नहीं है यद्यपि जीवन संघर्षपूर्ण है तथापि मानवीय परिपक्वता ने इन संघर्षों पर विजय प्राप्त कर जीवन को सरल बना दिया है जीवन में आने वाले सुख – दुख अथवा किसी भी प्रकार के परिवर्तन से निपटने के लिए एक दृष्टिकोण प्रदान किया है यही दृष्टिकोण एक सफल जीवन का मूल मंत्र है!

परिपक्वता के लक्षणों को उलटने पर अपरिपक्वता स्पष्ट हो जाती है यधपि एक सफल जीवन जीने के लिए परिपक्वता अत्यधिक आवश्यक है परंतु इसकी सबसे बड़ी हानि यह है कि एक परिपक्व व्यक्ति अपनी मासूमियत खो देता है !

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