festivals, Society

“टेसू के रंग”

त्यौहारों का अर्थ :हर त्यौहार अपने साथ खुशियां लेकर आता है जैसा की हम जानते हैं कि जीवन में दो चीज़ें अमिट छnाप छोड़ती हैं एक सुख और एक दुख कहते हैं सुख का प्रभाव लंबे समय तक नहीं रहता शायद यही कारण है कि त्यौहार प्रत्येक वर्ष अपनी छटा बिखेरने आ जाते हैं , होली भी उन्हीं में से एक है यह फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है अन्य त्योहारों की भांति होली भी बुराई पर अच्छाई की विजय की धोतक है !

निर्धनों का त्यौहार : होली का त्यौहार रंगों का त्योहार है रंग बिरंगे – रंगों की कल्पना अर्थात सुख की अनुभूति यूं तो प्रत्येक त्यौहार अपने साथ हजारों खुशियां लेकर आता है परंतु होली का त्यौहार कुछ विशेष है क्योंकि एकमात्र होली ही ऐसा त्यौहार है जिसमें वास्तविक अर्थों में धनी – निर्धन के बीच का अंतर समाप्त हो जाता है क्योंकि ना महंगे – महंगे कपड़े ना अन्य सामग्री खरीदने का दबाव !

समरसता :-हमारे पास जो भी है उसी में संतुष्ट होने का सुख होली जैसे त्योहारों से ही मिलता है वास्तव में त्यौहार का अर्थ ही खुशी है जो मेल मिलाप से मिलती है और रंग तो हर चेहरे पर अपना सामान रंग ही देता है अर्थात ना कोई भेदभाव ना कोई शत्रुता मानो जैसे सब एक दूसरे के मित्र हो , लोगों के साथ -साथ सारी धरती रंगों में रंग जाती है जहां देखो रंगो- गुलाल आकाश में बादलों की नीली -नीली चादर यूँ प्रतीत होता है जैसे धरती व अंबर एक हो गए हो !

सौहार्द :-यद्यपि माथे और पैरों पर गुलाल लगाने से बड़े बुजुर्गों का मान-सम्मान बना रहता है परंतु कभी-कभी भांग और अनावश्यक छेड़छाड़ से प्रतिकूल परिस्थितियों उत्पन्न हो जाती हैं जो शांति व सौहार्द पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं !

इकोफ्रैंडली :-आजकल तो रेडी टू ईट की तरह हर चीज रेडी टू यूज हो गई है अर्थात कृत्रिम रंग जो की रसायनो का मिश्रण होते हैं जो कई प्रकार से हमारी त्वचा और बालों को हानि पहुंचाते हैं जबकि पुराने समय में परंपरागत तरीके से होली खेली जाती थी टिशु व पलाश के फूलों से रंग बनाए जाते थे अर्थात परंपरा अनुसार हम इको फ्रेंडली ही थे जिसे पुनः प्राप्त करने के लिए हम संघर्षरत हैं !

दोष रंगों का नहीं :यहां इस बात का उल्लेख भी एक विशेष अर्थ रखता है कि रंगो के खेल में लोग कई गंदे खेल भी खेल जाते हैं लेकिन इसमें दोष रंगो का नहीं बल्कि भावना का है ,यदि कोई पूर्व प्रायोजित तरीके से नकारात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति करता है तो यह दोष त्योहारों या रंगो का नहीं नियत का है !

संवेदनशीलता से ओतप्रोत :हम नाचे -गाए ,खूब रंग लगाएं, खुद भी भीगे औरों को भी भिगायें ,खुशियों का त्यौहार खुशी से मनाएं !पर्यावरण का ध्यान रखें, पानी बचाएं ,खुद भी हंसें औरों को भी हसायें आइए मिलकर होली मनाएं ! एक ऐसी होली जो संवेदनशीलता से ओतप्रोत हो ,जो सहिष्णुता का प्रतीक हो एक ऐसी होली जो अपनो -परायों सब को एक डोर में पिरोले जहां हर कोई बोले होली है , होली की शुभकामनाओं के साथ !
धन्यवाद

🙏🙏🙏

Advertisements