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“यूं ही कड़वा करेला किसी की प्राथमिकता नहीं बन जाता !”

जीवन उस अद्भुत करिश्माई शब्द का नाम है जो विभिन्न खट्टे, मीठे कड़वे व नमकीन अनुभव कराता रहता है व्यक्ति फिर भी जीवन में कभी हार नहीं मानता और निरंतर संभावनाएं तलाश करता रहता है !संभावना का अर्थ है संभव होना और बात जब संभव होने की हो तो आप जानते ही हैं कि इस संसार में असंभव कुछ भी नहीं है !यद्यपि मृत्यु को आप नियंत्रित नहीं कर सकते तथापि मृत्यु के अतिरिक्त समस्त विषय आपके नियंत्रणाधीन हैं सबसे महत्वपूर्ण है आपका विश्वास जो आपको असफल नहीं होने देता कठिन परिस्थितियों में भी आपको थामे रखता है !

जीवन आपको कई खट्टे ,मीठे ,कड़वे अनुभव परोसता रहता है जीवन की इस अद्भुत थाली में परोसे गए इन व्यंजनों में से क्या खाना है ?क्या नहीं ?चुनाव आपका होता है ,कहा जाता है यदि विकल्प हो तो चुनाव सरल हो जाता है यद्यपि चुनाव आपकी समझ पर निर्भर करता है की आप स्वस्थ रहने के लिए खाते हैं या स्वाद के लिए !

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वास्तविकता तो यह है कि स्वस्थ रहने के लिए हमें खट्टे , मीठे, कड़वे सभी व्यंजनों की सम्मिलित रूप से आवश्यकता होती है यदि ऐसा नहीं होता तो भोजन में कड़वे व्यंजनों का महत्व न होता “यूँ ही तो कड़वा करेला किसी की प्राथमिकता नहीं बन जाता !”

जीवन में स्वाद और स्वास्थ्य दोनों में संतुलन आवश्यक है एक शरीर को स्वस्थ बनाता है और दूसरा जीवन को आ आनंदमय अतः जिस प्रकार एक स्वस्थ्य जीवन के लिए प्रोटींस , विटामिंस , कार्बोहाइड्रेट्स मिनरल्स से परिपूर्ण एक संतुलित भोजन की आवश्यकता होती है ठीक उसी प्रकार खट्टे , मीठे ,कड़वे और कुछ नमकीन अनुभवों का संतुलन जीवन को दिशा प्रदान करते हैं !

भोजन और जीवन दोनों के मध्य अंतर केवल चुनाव का है भोजन में इस संतुलन को हम स्वयं अपनाते हैं और कुछ अनुभव ना चाहते हुए भी जीवन में आ जाते हैं घबराइए नहीं यह कुछ एक क्षण ही आप को त्रस्त करगे क्योंकि जीवन में स्थिर कुछ भी नहीं है !

आप हाथ में पूजा की थाली लेकर समर्पण भाव से पूजा अर्चना करते हैं और बदले में मनोकामना करते हैं इच्छा कुछ पाने की जीवन में अद्भुत हो जाने की परंतु क्या आप जानते हैं ईश्वर ने यह यह थाली कर्म प्रधान बना रखी है ?तात्पर्य यह हुआ कि बाधित ना हो परिस्थितियों के वशीभूत होकर हार न माने कर्म प्रधान रहे !चलाएं मान रही है रुका हुआ तो जल भी दुर्गन्ध मारने लगता है इसलिए सदैब चलायमान रहें आगे बढ़ते रहें !

कई बार खट्टा खाने से दांत खट्टे हो जाते हैं और एसिडिटी हो जाती परंतु क्या हम खट्टा खाना छोड़ पाते हैं ?यद्यपि हम जानते हैं कि मीठा खाने से डायबिटीज हो जाती है परंतु क्या हम मीठा खाना छोड़ पाते हैं ?अधिक नमक ब्लड- प्रेशर का कारण बनता है यह जानते हुए भी क्या हम नमक लेना छोड़ पाते हैं ?क्या आपने कभी विचार किया है की पूर्णता नियंत्रण के अधीन होने के पश्चात भी हम इन हानिकारक भोज्य पदार्थों के सेवन पर आंशिक नियंत्रण ही स्थापित कर पाते हैं ! तो कटु अर्थात कड़वे अनुभव जो ह दूसरों से पाते हैं उन्हें पूर्णतः नियंत्रित कैसे कर सकते हैं ?इन्हें पूर्णतः नियंत्रित तो नहीं कर सकते परन्तु इनसे सीख लेकदर आगे अवश्य बढ़ सकते हैं !चाहे आर्थिक परिणाम ही क्यों ना प्राप्त हो प्रयास करना मत छोड़िए !

प्रयास करते रहिए ,आगे बढ़ते रहिए अगले ब्लॉग में फिर मुलाकात होगी तब तक हँसते रहिये हँसाते रहिये जीवन अनमोल है मुस्कुराते रहिये !

धन्यवाद

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life, motivation, personality development

” इंद्रधनुषी जीवन के रंग !”

रंग और जीवन

जीवन में रंगों का एक अलग ही मज़ा है कभी कुछ पाने का, कभी कुछ खोने का , कभी हंसने का ,कभी रोने का !ज़िंदगी एक जंग और इस जंग को लड़ते हुए हम ! अगर ये जंग न होती तो शायद हम भी हम न होते व्यक्ति का अस्तित्व उसके संघर्ष का ही परिणाम है व्यक्ति अपने संघर्ष से ही ज़ीरो से हीरो बन जाता है ये ज़ीरो से हीरो का सफर भी हमें रंगों का ही भान कराता है ! एकीकृत इंद्रधनुष कई रंगों का परिणाम होता है हमें केवल उसके रंग ही दिखाई देते हैं क्या आपने कभी इंद्रधनुष के बनने की प्रक्रिया पर विचार किया है रंगों का मिलना और उनका पृथक होना ,रंगों का अपने अस्तित्व के लिए ये संघर्ष नहीं तो और क्या है ?

जीवन के रंग

जीवन में इच्छा -अनिच्छा ,प्रेम -घृणा ,सुख -दुख शांति -अशांति, धनी -निर्धन ,क्रूरता -दया मनोभाव और विचार आदि मनुष्य के जीवनरूपी इंद्रधनुष के रंग है प्रत्येक रंग आपस में गुंथा हुआ है या यह भी कहा जा सकता है कि विभिन्न रंग एक दूसरे के साथ -साथ चलते हैं !

 इंद्रधनुषी जीवन के रंग
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परिस्थितियों से भागने से बेहतर है उन्हें सुलझाना

रंगों का यह साथ एक सार्वभौमिक सत्य है जिसे नकारा नहीं जा सकता !जो रंगों से रंग बनाने का हुनर सीख जाता है जीवन में वह जीत जाता है अतः जीवन रूपी रंगों से लड़ना सीखिए आगे बढ़ना सीखिए परिस्थितियों से भागने से बेहतर है उन्हें सुलझाना ,यदि आपने समझ है तो हर कोई आपके समक्ष है !क्षणिक एवं अस्थायी परिस्थितियों के आगे हार मान लेने का अर्थ है जीवन में स्थायित्व का नष्ट होना !आपकी समझ आपकी परिपक्वता का आईना है आईने में वही दिखाई देता है जो होता है !”क्योंकि आईना कभी झूठ नहीं बोलता !”

जीवन के हर रंग का आनंद लीजिये

जिस प्रकार आप रंगों से होली खेलकर प्रफुल्लित हो उठते हैं उसी प्रकार जीवन के रंगों से भी खेलना सीखिए !विश्वास कीजिए जीवन आनंदमय हो जाएगा हरा ,लाल ,नीला केवल यही आधारभूत रंग जीवन का आधार नहीं है जीवन नाम है रंगों के मिश्रण का इसलिए हर रंग को इंजॉय कीजिए !

रंगों से खेलिए उनका आनंद लीजिये !अगले ब्लॉग में फिर मुलाक़ात होगी तब तक हँसते रहिये हँसाते रहिये ,जीवन अनमोल है मुस्कुराते रहिये !

धन्यवाद

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