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” ये वहम है कैसा !”

मुझको रोने भी नहीं देता -ये सितम है कैसा !

मिली हंसने की सज़ा – के ये गम है कैसा !

अश्क़ बरसात में शामिल ज़र्रा -ज़र्रा मुक़ाबिल!!

सच गर ये जो नहीं -तो- ये वहम है कैसा !!

घिर गए हैं ,भंवर में -चल -चलके किनारे !!!

करदे जो ज़ख्म हरा -वो ,मरहम है कैसा !!!

जिसको भी देखिये -एक शिकायत है नयी iv

तुझपे राहत , क़िस्मत का -ये करम है कैसा iv