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“तकब्बुर कैसा !”


दिल जो ख्वाबों का !

आशियाना है !

वो भी एक दौर था !

ये भी एक ज़माना है !

गम दे जो मुसलसल !!

ठहरे न ख़ुशी !!

किस तरहाँ ये !!

गम का आना जाना है !!

थे जो मशहूर कभी !!!

ख़ास वजाहों के लिए !!!

आम उनको भी !!!

एक रोज़ हो जाना है !!!

काहे का फ़क़्र iv

तकब्बुर कैसा iv

जो कमाया था iv

सब यहीं रह जाना है iv