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“तुमने सोचा है कभी क्या ?”

ज़िन्दगी एक कभी न रुकने वाला सफर है ………!

कर ताना बाना -कोई ,बहाना न बना !

हार और जीत -दो पहलू !

न ठहर , एक जगह -एक, ठिकाना न बना !

चल ,परिंदों सा – उड़ चल !!

जो न ठहरे -वो हवा !!

जो ,बरसे तो बादल -और, ठहरे तो मक़ा !!

ज़िंदगी है -कोई सौगात !!!

इत्तेफ़ाक़ नहीं -न ठहरो !!!

कब मिल जाये -सौगात ,किसे क्या !!!

सब है मुमकिन iv

सब सोचों से बदल जाता है iv

ज़िन्दगी है हकीकत – तुमने ,सोचा है कभी क्या iv

किसलिए
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“एक सोच -किस लिए !”

 ये भुलावा किस लिए
ये भुलावा किस लिए

कुछ नहीं है ज़िन्दगी में फिर दिलासा किस लिए !

रंजो गम हैं बिखरा हर सू फिर तमाशा किसलिए !!

हर लम्हा एक सदी सा -लम्बा है यूँ इंतज़ार !

है न परवाह किसी की फिर दिखावा किसलिए !!

फिर भी हर पल मुस्कुरायें ये छलावा किस लिए !!

आरज़ू ए गम छुपा है साथ हर एक सोच के !

बन गया पत्थर ये दिल आँख भी पथरा गयी !

आज दिल की मजलिस में हुए नाकाम हम !

ज़ख्म जब कोई नहीं तो फिर ये छाले किस लिए !!

हैं अकेले जो अगर तो भीड़ ये फिर किसलिए !!

गुलशन के बीच काँटे न चुभे मुमकिन नहीं !

सिर्फ फूलों की तमन्ना फिर भला किस लिए !!

नाकामियों के दरमियान जब उम्मीद भी कोई नहीं !

फिर परेशां क्यों है दिल फिर दुआयें किस लिए !!