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"नारी विजयी बन जाती !"

न दर्द की मारी – बन जाती i
न फिर – बेचारी बन जाती ii
जो आज – उठा लेती खंजर iii
न निर्बल बेचारी -बन जाती iv

आवाज उठाओ – संघर्ष करो i
सौगंध उठाओ – अब ना डरो ii
बच जाती – निर्भया ,प्रियंका iii
जो न अबला – बन जाती iv

ना मर्दों की – भीड़ है i
चार पुरुषों की – जंजीर है ii
अगर न होता – पुुुुुरूष गैंग में

नारी विजयी -बन जाती iv

ना भूलो के – माता है i
नारी ,बहन – तुम्हारी है ii
आज न तुम – सम्मान करो iii
कल ,तुम्हारी – बारी है iv
इंसानियत से – सोचते गर v
बहन तुम्हारी – बन जाती vi

swatantra astitva
सोशल ईविल, beauty, humble ,kind and polite, life, Society

“स्त्री ,जो समस्त संसार का आधार है ! स्वयं निराधार कैसे हो सकती है?”

संसार में नारी को निसहाय निर्बल व अबला समझने वालों की कोई कमी नहीं है !नारी अबला नहीं है ,न हीं वह बेचारी है वह तो षड़यंत्र की मारी है! नारी को अबला प्रचारित या घोषित करना इस छदम पुरुषप्रधान समाज का एक दुस्साहस प्रयास मात्र है !प्रेम, मोह- माया व संबंधों के प्रति समर्पण ममता व करुणा के वशीभूत होकर उसने स्वयं ही अपनी प्रगति को बाधित किया है जो कि उसकी कोमल भावनाओं का प्रतीक है उसकी कोमलता से उसकी कमजोरी का अनुमान लगाना पूर्णतःअनुचित है !

महिलाओं के संदर्भ में इस गीत की पंक्तियाँ बहुत सटीक बैठती हैं
कोमल है कमज़ोर नहीं तू !
शक्ति का नाम ही नारी है !!