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“उड़ते हैं परिंदे सब ….!”

एक ऐसा जहां हो !

जहां कोई न पशेमा हो !

हो हर कोई जहां अपना !

हर दिल में मुहब्बत हो !

ये मेरा इंडिया

मिले इंसा से जहां इंसा !!

रिश्ता है वही गहरा !!

ये हिन्दू मुसलमा क्या !!

हर दिल में चाहत हो !!

खुले आसमा में जैसे !!!

उड़ते हैं परिंदे सब !!!

एक साथ ज़मी पर यूं !!!

मिलेंगे यहां सब कब !!!

के चैन मिले दिल को !!!

और रूह को राहत हो !!!