shayri
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“तुमने सोचा है कभी क्या ?”

ज़िन्दगी एक कभी न रुकने वाला सफर है ………!

कर ताना बाना -कोई ,बहाना न बना !

हार और जीत -दो पहलू !

न ठहर , एक जगह -एक, ठिकाना न बना !

चल ,परिंदों सा – उड़ चल !!

जो न ठहरे -वो हवा !!

जो ,बरसे तो बादल -और, ठहरे तो मक़ा !!

ज़िंदगी है -कोई सौगात !!!

इत्तेफ़ाक़ नहीं -न ठहरो !!!

कब मिल जाये -सौगात ,किसे क्या !!!

सब है मुमकिन iv

सब सोचों से बदल जाता है iv

ज़िन्दगी है हकीकत – तुमने ,सोचा है कभी क्या iv