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“शोरो – गुल के दर्मिया सन्नाटा बहुत है !”

मैं बेचैन रहकर ही सही !

हंसता तो हूं !!
तुम तो चैन से रहकर भी !!!

बैचेन रहा करते हो iv


मैंने ,बदल लिया खुदको !
बदले हुए हालातों के साथ !!
तुम आज भी- हालातों का !!!

शिकार रहा करते हो iv


तुमको मेरे हंसने से शिकायत है !
और मुझे गमगीन रहने से !!
फ़िर शिकायत क्यूं !!!
कि कैसे ,इतने iv

पुरसुकून रहा करते हो v


बाहर के शोरो – गुल ,के दरमियान !
सन्नाटा बहुत है !
और उसपे ये शिकायत !!!

के तुम शोर बहुत करते हो !v