personality development

“व्यक्तित्व विकास के टिप्स “

व्यक्तित्व विकास को लेकर लोगों में कई भ्रांतियां पायी जाती हैं कई लोग आपके चलने- बोलने , उठने – बैठने को व्यक्तित्व विकास बताते हैं तो कुछ लोग ,लोगों से व्यवहार व कार्य व्यवहार और घर- बाहर के कार्यों में संतुलन को व्यक्तित्व विकास की संज्ञा देते हैं और कुछ लोग आपके सोशल कनेक्शंस को व्यक्तित्व विकास से जोड़कर देखते हैं परंतु व्यक्तित्व विकास इन सबसे कुछ ज्यादा है जो आपके फिजिकल अपीयरेंस के साथ साथ मेंटल स्टेटस को भी दर्शाता है !

आपके उठने -बैठने ,बोलने -चलने व लोगों से व्यवहार व आप के लुक्स एंड अपीयरेंस से केवल यह पता चलता है कि आप कितने सभ्य हैं !

परंतु आप तार्किक आधार पर कितने सक्षम हैं अर्थात आपमें logical ability कितनी है आप अपने काम को कैसे करते हैं , या करवा लेते हैं किस प्रकार निर्णय लेते हैं और किस प्रकार दूसरों से से मनवा लेते हैं ,किसी परिस्थिति विशेष में आप कैसा व्यवहार करते हैं !

तर्क या logical thinking ,आत्मविश्वास ,ईमानदारी , वफादारी प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति आपका व्यवहार , आपका हंसमुख रवैया ,विनम्रता इन सब का सम्मिलित रूप ही व्यक्तित्व विकास कहलाता है यधपि इसमें लुक्स -अपीयरेंस ,हाव-भाव और कार्य व्यवहार आदि भी सम्मिलित रहते हैं !

व्यक्तित्व विकास के टिप्स

Tips for personality development

वफादार रहिये (To be honest)

अपने घर -परिवार व कार्य व्यवहार के प्रति वफादार रहिए इससे आपके सामने या जब आप सामने ना भी होंगे तब भी लोग आप पर विश्वास करेंगे ,किसी भी प्रकार की प्रतिबद्धता को पूरा कीजिए इससे ना सिर्फ आप में संतोष की भावना जागृत होगी अपितु लोगों का आप में विश्वास भी बना रहेगा !

आत्मविश्वास बनाये रखिये

(To be confident)

व्यक्तित्व विकास का पहला चरण है आत्मविश्वास अर्थात खुद पर यकीन रखिए , प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपना मनोबल बनाए रखें ,अपनी क्षमताओं पर कभी भी संदेह न करें ,खुद की प्रेरणा खुद बने , अपने निर्णयों पर विश्वास रखें ,अपनी सफलता पर विश्वास रखें ,अपने ऊपर विश्वास रखें कि जीवन में ऐसा कुछ नहीं है जिसे आप कर नहीं सकते या पा नहीं सकते !

ईमानदार रहिये (To be loyal)

याद रखिए अगर आप ईमानदार होंगे तो लोग भी आपके प्रति ईमानदार और वफादार बने रहेंगे ,नहीं तो जैसे को तैसे का नियम (Tit for tat)तो सुना ही होगा आपने यदि आप किसी के साथ जैसा व्यवहार करेंगे तो लोग पलटकर आपके साथ वैसा ही व्यवहार करेंगे !

सकारात्मक दृष्टिकोण अपनायें

(positive thinking)

मन में किसी भी प्रकार का नकारात्मक भाव या संदेह न आने दें , प्रत्येक कार्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाये ,अपनी योग्यताओं पर विश्वास रखें , कार्यों की प्राथमिकता निर्धारित करके कार्य करें ताकि कार्य समय से पूरा होने से आप पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव ना पड़े और आप कार्यों के बोझ में न दबे क्यूंकि समय से कार्य पूरा न होने से स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ सकता है !

मन को नियंत्रित रखें

(Control your mind)

आपका मन ही है ,जो आपका मित्र और शत्रु दोनों हैं आपका मन जब तक आपके आपके नियंत्रण में है तब तक आपका मित्र है और जब नियंत्रण से निकल गया तो शत्रु ,अतः मन को नियंत्रण में रखें ,और ऐसा मन व मस्तिष्क के संतुलन से ही संभव है जहां मन की जरूरत हो वहां सिर्फ मन का ही प्रयोग करें और जहां मस्तिष्क की आवश्यकता हो वहां मस्तिष्क का ऐसा नहीं कहां जा सकता क्योंकि दोनों के संतुलन का नाम ही जीवन है !

वास्तविक अर्थों में वही विकास व्यक्तित्व विकास है जो व्यक्ति के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में सहायक सिद्ध हो इसलिए आगे बढ़ते रहिये ,अगले ब्लॉग में फिर मुलाक़ात होगी तब तक हंसते -रहिए ,हंसाते -रहिए ,जीवन अनमोल है मुस्कुराते रहिये ! धन्यवाद !

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