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“तकब्बुर कैसा !”


दिल जो ख्वाबों का !

आशियाना है !

वो भी एक दौर था !

ये भी एक ज़माना है !

गम दे जो मुसलसल !!

ठहरे न ख़ुशी !!

किस तरहाँ ये !!

गम का आना जाना है !!

थे जो मशहूर कभी !!!

ख़ास वजाहों के लिए !!!

आम उनको भी !!!

एक रोज़ हो जाना है !!!

काहे का फ़क़्र iv

तकब्बुर कैसा iv

जो कमाया था iv

सब यहीं रह जाना है iv

गाँधी जी
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” ये कैसा अभिमान है !”

एक महान विचारक

वनदे ,वनदे ,वनदे !

बने हम ऐसे बन्दे !

के दुनियां याद करे !

मेरे बाद करे !

दूसरों की खुशी से हो !!

खुशी हासिल !!

दूसरों के गम से !!

बह निकले !!

आँख का काजल !!

एक दुसरे का दर्द हो !!

ऐसा ज़माना आ जाये !!

वनदे , वनदे , वनदे !!

बने हम ऐसे बन्दे !!

की दुनियां याद करे !!

मेरे बाद करे !!

भूल तो होती रहेगी !!!

आखिर को इंसान हैं !!!

खून की होली खेले जो !!!

ये कैसा अभिमान है !!!

भगवान दे शक्ति हमें !!!

माफ़ करना आ जाये !!!

वनदे ,वनदे ,वनदे !!!

बने हम ऐसे बन्दे !!!

की दुनियां याद करे !!!

मेरे बाद करे !!!