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"वक़्त की तलाश में …..!"

कयामत ,की रात -थी वो !
जब ,उसका – ज़वाल देखा !!
हर एक – शख्स के !!!
लब पे – सवाल देखा !!!!

मुकद्दर , किसी का – यूं !
बिगड़े न – इस तरह !!
अपनों की – थी महफिल !!!
गैरों सा – हाल देखा !!!!

वाबस्ता – जो , नहीं थे !
थे वो भी – वक्त की तलाश में !!
रखते थे – वह ,भी क्या !!!
दिल में – ख्याल ,देखा !!!!

दिल शिकनी – करके भी था !
खुद पर – जिन्हें गुरूर !!
इनायत – का उनकी !!!
क्या-क्या गुमान देखा !!!!

दिल से – निभाए जो !
बस ,शिद्दत – उसी में है !!
नाम के – रिश्तों का !!!
तो बस – कतले आम देखा !!!!

दुनिया है ये – इससे कोई !
तवकको – न कीजिए !!
गुलशन -उजाड़ कर भी !!!!
न ,इसको – मलाल देखा iv

pixabay
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” लोग नादान है !”

ख्वाब भी है खयाल भी है !

कोई दिल में सवाल भी है !

क्यों यह होता है !

माजरा क्यों कर !

क्यों उरूज के बाद !

ज़वाल भी है !

छीन लेते हैं लेते हैं खुशी क्यों !!

बीते वक्त के साए !!

खुद छुपा है जवाब इसमें !!

खुद ही सवाल भी है !!

कशमकश है !!!

एक कश्ती दो किनारे !!!

एक पाने की खुशी !!!

एक खोने का मलाल भी है !!!

सोचते हैं चलो सब iv

भूल कर सो जाते हैं iv

बचते हैं करके कनारा iv

गुजर जाते हैं iv

है गर लब पे पहरे तो iv

ख्वाबों में कलाम भी है iv

मुकद्दर से जो लड़ते हैं v

लोग नादां हैं v

है अगर यह ज़वाल v

तो कमाल भी है v